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शिक्षा का बाजारीकरण राष्ट्र हित में नही है-राम नाईक

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विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा
बस्ती 25 फरवरी उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने शिक्षा केबाजारीकरण पर गम्भीर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे कुछ लोगो का लाभ होताहै। लकिन राष्ट्र के हित में ऐसी शिक्षा नही होती है। शिक्षा के साथ संस्कारदिया जाना समाज और राष्ट्र के हित में होता है।उत्तर प्रदेश के बस्ती जिला मुख्यालय के सरस्वती विद्यामंदिर वरिष्ठमाध्यमिक विद्यालय के नव निर्मित माधव भवन का लोकार्पण करने के बाद आयोजितसमारोह को सम्बोधित करते हुएउन्होने कहा कि शिक्षा के प्रसार से समाज और राष्ट्र का विकास होता है,शिक्षाका दान करने से शिक्षा बढती है।शिक्षा एक ऐसा गुण है जिसे कोई चुरा नही सकता।
उन्होने कहा कि गुणवत्तापूर्णशिक्षा प्राप्त करना सभी छात्रांें का अधिकार है और सभी शिक्षकों तथाप्रबंधतंत्र का दायित्व है कि वह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करें ।गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से चरित्र का निर्माण होता है। उन्होने छात्रों सुझावदिया कि कठिन परिश्रम करके शिक्षा प्राप्त करें लेकिन किताबी कीड़ा न बनें।उन्होने छा़त्रांे को सुझाव दिया कि शिक्षा के साथ खेल-कूद में भी चार पर हिस्सा लेंव्यायाम करते रहें।उन्होने कहा कि योग का ज्ञान सदियों से भारत वासियों को है, योग महत्ता कोपूरे विश्व ने माना और 31 जून 2015 को पूरे विश्व में योग दिवस मनाया गया।उन्होने कहा कि वर्ष 2014 मेंदेश में जनक्रान्ति हुई है। भारत आज विश्व का सबसे युवा देश है, चीन औद्योगिकविकास में आगें है लेकिन आने वाले दिनो में भारत उसे पीछे छोड देगा। भारतविश्व का सबसे युवा देश है देश केअभिवकों को अपने बच्चों की शिक्षा की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए और व्यक्तित्वविकास पर बल देना चाहिए।
उन्होने छात्रों से कहा कि लक्ष्य प्राप्त करने केलिये मुस्कारते रहों, अच्छे कार्य कोअच्छा कहों और अहंकार से बचों।उन्होने उत्तर प्रदेश की महत्ता की चर्चा करते हुए कहा कि यह प्रदेश भगवानश्रीराम, भगवान श्री कृष्ण, गौतम बुद्ध की भूमि है इस भूमि से अनेक महापुरूषजुडे हुए है। उनका प्रयास है किराज्य के 25 विश्व विद्य़ालयों जिनके वे कुलाधिपति है उनमें गुणवत्तापूर्णशिक्षा देने का वातावरण सृजित हो।उन्होने विद्या भारती की सराहना करते हुए कहा कि देश भर में 25 हजारविद्यालयों के माध्यम से 40 लाख छात्रो को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कियाजाता है। दुनिया में अन्य कोई ऐसी संस्था नही है। जो बिना किसी सरकारी सहयोगके अपने बलबूते शिक्षा का इतना बडा कार्य संचालित करती है। इस मौके पर उन्होनेविद्यालय की पत्रिका का विमोचन करने के साथ मेधावी छात्रों को सम्मानित किया।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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