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सिजनल बुखार का कहर

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
गोरखपुर 7 नवम्बर, गर्मी ढलान पर है। मौसम बदल रहा है। सुबह रात, में ठंड तो दिन में धूप व गर्मी। तापमान में यह उतार-चढ़ाव सेहत पर भी असर डाल रहा है। थोड़ी भी लापरवाही बीमार बना सकती है। अस्पतालों में वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम के मरीज की तादाद में इजाफा हुआ है तो दमा व श्वास के मरीजो की परेशानी बढ़ी है। दमा का अटैक होने से अस्पताल में भर्ती होने की नौबत देखी जा रही है।
हालांकि हर उम्र के लोगो पर इसका असर देखा जा रहा है पर इनमें बच्चों व बुजुर्गो की तादाद अधिक है। मेडिकल कालेज, जिला अस्पताल के साथ निजी चिकित्सको के पास ऐसे मरीजो बड़ी तादाद में पहुंच रहे है। सामान्य दिनों की तुलना में मरीजो की तादाद में पहुंच रहे है। सामान्य दिनों की तुलना में मरीजो की तदाद पचीस फीसद बढ़ गई है। जो पहले से श्वास के रोगी है।
बीआरडी मेडिकल कालेज के ईएनटी विभाग के पूर्व चिकित्सक डा0 आरएन शाही के अनुसार इन दिनों आने वाले मरीज बुखार , नाक बहने , बार-बार छींक आने, सूखी खांसी, गले में खराश व दर्द, कान में दर्द, सिरदर्द व सुस्ती आदि के परेशानी, आवाज मंे भारीपन, सांस लेने में परेशानी , सीने में जलन व दर्द देखा जा रहा है। दमा के मरीजो को बदलते मौसम में अधिक खतरा होता है। ऐसे मरीजो को अधिक सावधानी बरतानी चाहिए क्यों कि लापरवाही मुसीबत डाल सकती है।
तापमान में इस उतार चढ़ाव का असर बच्चों पर अधिक देखा जा रहा है। आजकल बच्चों में सीने में संक्रमण, जकड़न व निमोनिया से पीडि़त बच्चों की तादाद बढ़ी है। इसमें छह माह से दो साल तक के बच्चों की संख्या अधिक है। यदि बच्चों को बुखार, सर्दी-खांसी, सांस लेने में दिक्कत के साथ पसली तेज चल रही तो सावधान हो जाना चाहिए।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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