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सावन में शिव आराधना का विशेष महत्व

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
गोरखपुर 13 जुलाई, सावन के महीने में शिव की आराधना की विशेष महत्ता मानी गई है। सावन के सोमवार को शिव की आराधना मनोवांक्षित फल देने वाली मानी जाती है। सावन के प्रारंभ होने के साथ ही महानगर के प्रमुख
मंदिर के सामने भगवान शिव की पूजा में प्रयुक्त होने वाले सामानों बेलपत्र, धतूरा, भांग, दूध, फूल,-मालाओं आदि की दुकाने सज गई है और श्रावण मास के तीसरे दिन बुधवार को भी भक्त मंदिरो में दर्शन-पूजन को आए।
श्रावण मास में श्रवण नक्षत्र की विशेष प्रधानता है। इस मास पूजा-पाठ अनुष्ठान, रूद्रभिषेक, शिवपुराण, आदि से प्रसन्न होकर भगवान शिव अपने भकतों को सब कुछ दे देते है।
पं0 लक्ष्मी नारायण शास्त्री ने शिव की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान शिव सर्वोपरि परत्पर तत्व है अर्थात जिनसे परे और कुछ भी नही है। भगवान शिव शंकर के चरित्र बड़े ही उदात एवं अनुकम्पापूर्ण है। शिव जी को जल अत्यंत प्रिय है।
यदि भूलवश भी जल भगवान शिव के ऊपर पड़ जाए तो वे प्रसन्न होकर जन्म-जन्मांतर के पापो को दूर कर देते है।
आचार्य पं0 शरद चन्द्र मिश्र ने बताया कि शिवोपासना कालपयी है। शिवोपसना अथवा लिंगोपसना श्रुति-स्मृति में प्रतिपादित है। शक्ति और शक्तिमान का प्रतीक पुरूष प्रकृति का सहज चिन्ह शिव स्वरूप विश्व के अणु-अणु में विद्यमान है।
उन्होने कहा कि वैज्ञानिक शिव को परमाणु ऊर्जा के रूप मे देख सकते है। शिवलिंग भी परमाणु का ही प्रतीक है। शिव का ताण्डव नृत्य परमाणु ऊर्जा का ही विनाशकारी रूप है। संपूर्णविधाओं और कलाओं के भगवान नीलकंठ आचार्य है।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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