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सरकारी क्रय केन्द्रों पर गेहूं की खरीद नहीं हो रही है

आलोक कुमार श्रीवास्तव
विचारपरक संवाददाता
सिद्धार्थनगर 13 अप्रैल, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को गेहूं का उचित मूल्य दिलाने के लिए जिले में 95 गेहूं क्रय केन्द्र स्थापित किया गया है। खरीद एजेन्सियों की सुस्ती और उदासीनता के चलते अभी तक क्रय केन्द्रों पर कोई व्यवस्था गेहूं खरीद की नहीं किया गया है। इससे जिले के किसान अपना गेहूं साहूकारों के हाथ बेचने को मजबूर है।
आज यहां यह जानकारी देते हुए जिला पंचायत सदस्य मो0 जमाल ने कहा है कि गेहूं क्रय केन्द्रों पर अभी तक गेहूं खरीद का बोर्ड नहीं लगाया गया है और न ही रेट भाव लिखा गया है। इससे किसान अपना गेहूं औने पौने दाम पर साहूकारों से मजबूरन बेंच रहे है। कागजों में भले ही गेहूं खरीद केन्द्र खुल गये है। लेकिन सच्चाई यह है कि अभी तक गेहूं क्रय केन्द्र व्यवस्थित ढंग से खोले ही नहीं गये है।
इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए सूत्रों ने ‘‘विचारपरक’’ को बताया है कि निजी तौर पर गेहूं खरीदने वाले व्यापारी, साहूकार, किसानों से गेहूं खरीद करके उनके खेत खलिहान घर से तौल करके नकद रूपया किसानों को प्रदान कर रहे है। वहीं दूसरी ओर सरकारी क्रय केन्द्रो पर अभी तक गेहंू खरीद का बोर्ड भी नहीं लगाया गया है।
इस सम्बन्ध में सरकारी सूत्रों ने बताया है कि इस वर्ष जिले में गेहूं खरीद का लक्ष्य दो गुना करते हुए 1.32 लाख मैट्रिक टन कर दिया गया है। जिसके लिए खाद्य विभाग के 13, पीसीएफ के 74, यू0पी0 एग्रो के 1, कर्मचारी कल्याण निगम के 2, पंजिकृत समितियों के 4 तथा भारतीय खाद्य निगम का 1 क्रय केन्द्र स्थापित किया गया है। लेकिन सरकारी क्रय केन्द्रों पर कोई इन्तजाम न होने के कारण किसान अपना गेहूं नकद मूल्य प्राप्त करने के लालच में कम दाम पर बेंच रहे है। इससे सरकार की मंशा के अनुरूप किसानों को गेहूं का मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
सरकारी सूत्रों न यह भी बताया है कि शासन द्वारा गेहूं खरीद के लिए जिले के सम्बन्धित विभाग को पिछले वर्ष के 61.600 हजार मैट्रिक टन के लक्ष्य को दो गुना करते हुए 1.32 लाख मैट्रिक टन करते हुए एक क्रय केन्द्र भी बढ़या गया है।
बावजूद इसके अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष एक प्रतिशत भी गेहूं खरीदा जा सका है। विभागीय सुस्ती का आलम यह है कि विभाग द्वारा अपनी ही एजेन्सियों का संचालन ठीक ढंग से नहीं कर पाता है, तो अन्य क्रय एजेन्सियों पर क्या लगाम लगायेगा। गेहूं केन्द्र या तो बन्द मिलते हैं या फिर वहां संसाधनों की ही घोर कमी रहती है। जिसके किसानों की कमाई को औने-पौने दामों पर बिचैलियों के हाथों बेचने को मजबूर होना पड़ता है। बताते चले कि शासन द्वारा पिछले वर्ष गेहूं खरीद का लक्ष्य 61.600 मैट्रिक टन रखा गया था। जिसके लिए कुल 94 क्रय केन्द्र स्थापित किये गये थे, परन्तु पूरा सीजन बीत जाने के बाद भी एजेन्सियों द्वारा लक्ष्य के सापेक्ष 1927 किसानों से केवल 11222.99 कुन्तल गेहूं खरीदा गया था। यह लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 25.05 प्रतिशत ही था।
इस सम्बन्ध में कई किसान नेताओं ने मांग किया है कि युद्ध स्तर पर सरकारी क्रय केन्द्रों पर गेहूं की खरीद शुरू की जाय और शासन की मंशा के अनुरूप किसानों को उचित मूल्य दिलाया जाय। सरकार द्वारा किसानों को नकद या खाते में भुगतान उसी दिन कराने की व्यवस्था भी किया जाय।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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