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सपा-भाजपा के बीच सीधा मुकाबला

(विचारपरक प्रतितिधि द्वारा)
बस्ती 22 फरवरी, स्थानीय निकाय विधान परिषद चुनाव के लिए आगामी 3 मार्च को होने वाले मतदान में समाजवादी पार्टी सन्तोष कुमार उर्फ सन्नी यादव एवं भाजपा के प्रमोद कुमार उर्फ गिल्लम चैधरी से सीधा मुकाबला है। इस चुनाव में कांग्रेस एवं अन्य दलो ने अपने उम्मीदवार नही घोषित किये है। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार संतोष उर्फ सन्नी यादव को भाजपा के उम्मीदवार प्रमोद चैधरी कडी टक्कर देने में लगे है।
हालांकि इस चुनाव के पहले सन्नी यादव का इस क्षेत्र की राजनीति से कोई सरोकार नही रहा है। लेकिन उम्मीदवार बनाये जाने के बाद समाजवादी पार्टी मंे संगठन के लोग एवं प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राज किशोर सिंह अपनी प्रतिष्ठा मानकर चल रहे है। जबकि दूसरे तरफ भाजपा के स्थानीय सांसद हरीश द्विवेदी एवं डुमरियागंज के सांसद जगदम्बिका पाल, संतकबीरनगर के सांसद शरद त्रिपाठी सपा उम्मीदवार को कड़ी चुनौती देने में लगें है। हालांकि दबी जुबान से लोग यह स्वीकार करते है कि इस चुनाव मंे सत्तारूढ दल का प्रभाव इस्तेमाल करके चुनाव जीता जा सकता है। सिद्धार्थनगर स्थानीय निकाय चुनाव परिणामों पर यदि गौर किया जाय तो पिछले दो दशक में सत्तारूढ दल के उम्मीदवार ने ही सफलता प्राप्त की है। वर्ष 1989 में तत्कालीन जनता दल की सरकार होने पर दयाराम चैधरी निर्वाचित घोषित किये गये थें। दूसरी बार भाजपा के मनीष जायसवाल निर्वाचित हुए। पिछले चूनाव में भाजपा उम्मीदवार मनीष जायसवाल ने चुनाव के वक्त पाला बदलकर बसपा दामन थाम लिया था और निर्वाचित घोषित किये गये थे।
पिछले 18 वर्षों से मनीष जायसवाल विधान परिषद में बस्ती, सिद्धार्थनगर का प्रतिनिधित्व किया। इस बार चुनाव मैदान में नही है। इस चुनाव में बसपा और कांग्रेस के उम्मीदवार न होने के कारण बसपा व कांगे्रस समर्थक मतदाताओं का मत निर्णायक हो सकता है। वर्तमान समय में बस्ती सिद्धार्थनगर से सरकार व संगठन में इस क्षेत्र के कद्दावर नेता शामिल है। सिद्धार्थनगर जिले के माता प्रसाद पाण्डेय विधानसभा अध्यक्ष हे पूर्व सांसद व समाजवादी नेता स्व0 बृजभूषण तिवारी के पुत्र राज्यसभा सदस्य है।
संन्कबीरनगर जिले से पप्पू निषाद प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री है तथा बस्ती जिले में समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता एवं कैबिनेट मंत्री राजकिशोर ंिसह प्रदेश सरकार में कई विभागो का दायित्व सम्भाल रहे है। ऐसे में निसंदेह समाजवादी पार्टी का खेमा मजबूत दिखाई दे रहा है। ऐसे में मतदाताओं का निर्णय ही किसी भी उम्मीदवार के सिर पर जीत का सेहरा बांध सकता है।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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