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संत परमहंस 6 दिसम्बर को आत्मदाह करने की घोषणा किया

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
फैजाबाद 4 नवम्बर, रामजन्मभूमि पर भव्य मन्दिर निर्माण को लेकर 12 दिनों तक आमरण-अनशन कर सुर्खियों में आए तपस्वी छावनी के उत्तराधिकारी महन्त स्वामी परमहंस दास ने रविवार को अपने आश्रम पर प्रेसवार्ता में कहाकि जिस दिन उच्चतम न्यायालय ने राममन्दिर मामले की सुनवाई आगे के लिए बढ़ा दी। इससे हम सौ करोड़ हिन्दूओं का धैर्य पूरी तरह से टूट गया। अब केन्द्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार से उम्मीद है। वह पूर्ण बहुमत में हैं और राममन्दिर के नाम पर ही सत्ता में आए। उनसे मांग करते हैं कि जिस प्रकार ट्रिपल तलाक व एससीध्एसटी एक्ट पर कानून बनाया। ठीक उसी प्रकार कानून बनाकर 6 दिसम्बर के पहले-पहले राममन्दिर निर्माण की घोषणा हो करे।
उन्होंने कहाकि मन्दिर मसले पर मैं पीएम मोदी को 5 दिसम्बर तक का समय देता हूं। वह राममन्दिर निर्माण की तिथि घोषित कर दें। नही तो मैं 6 दिसम्बर को यहीं पर आत्मदाह कर लूंगा तथा समझूंगा कि बीजेपी सरकार से अब तक जो उम्मीदें थी। वह पूर्ण रूप से खत्म हो गई। मेरे पास शिवाय आत्मदाह के और कोई रास्ता नही बचा है। इसलिए केन्द्र की भाजपा सरकार से गुजारिश है। यदि सौ करोड़ हिन्दूओं को न्याय देना चाहते हैं। तो जल्द से जल्द कानून बनाकर राममन्दिर निर्माण की तारीख घोषित करें। महन्त ने कहाकि मुझे खेद है कि सौ करोड़ हिन्दूओं के तीर्थों में सर्वश्रेष्ठ अयोध्या जो कि हमारे आराध्य भगवान राम की जन्मभूमि है। आज तक वहां कोर्ट निश्चित नही कर पा रहा है कि यहां भगवान राम को न्याय मिले या आतंकवादी बाबर को। हम सबका सम्मान करते हैं, हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई सब एक हैं। आज तक त्रेतायुग में भगवान राम 14 वर्षों तक वनवास में थे। लेकिन इस समय की जो सरकारें हैं। उन्होंने हमारे राम को टेण्ट वास दे दिया है। सब लोग एसी में रह रहे हैं। परन्तु हमारे राम पन्नी में हैं।
हम बहुसंख्यक हिन्दू समाज अब इस अपमान को कतई बर्दाश्त नही कर सकते। एक सवाल के जवाब में श्री दास ने कहाकि बहुत अच्छी बात है भगवान राम की प्रतिमा अयोध्या में लग रही। लेकिन उनकी प्रतिमा इतनी ऊंची होनी चाहिए, जितनी ऊंची पूरे विश्व में किसी की प्रतिमा न हो। क्योंकि भगवान राम हमारे आस्था के केन्द्र हैं। अगर राम की प्रतिमा छोटी हुई। तो यह हिन्दूओं का अपमान होगा। साथ ही साथ प्रतिमा के पूजन-अर्चन की भी व्यवस्था होना चाहिए। बहुत खुशी की बात है सरकार महापुुरुषों की प्रतिमा लगवाकर उनका सम्मान कर रही है। जिस प्रकार अभी हाल में लौह पुरूष सरदार बल्लभभाई पटेल की प्रतिमा लगी। वह काबिले तारीफ है। अयोध्या में लगातार दो वर्षों से दीपोत्सव पर्व की परम्परा शुरू करने के लिए सीएम योगी को बहुत-बहुत साधुवाद है। वह बधाई के पात्र है इस तरीके से इतना बड़ा और भव्य कार्यक्रम मुख्यमंत्री यहां कर रहे हैं। महन्त परमहंसदास ने कहाकि राम के नाम पर एक विश्वविद्यालय की स्थापना होनी चाहिए, जिसका नाम लार्ड राम यूनिवर्सिटी हो। जहां भारतीय संस्कृति के अनुरूप शिक्षा का स्तर शिखर को छुए।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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