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श्रोता शिवविवाह प्रसंग सुन भावविभोर हुए

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 27 फरवरी, जिले के दुबौलिया थाना क्षेत्र क¢ चन्दहा गांव में चल रहे द्वितीय सतचण्ड़ी महायज्ञ एवं मानस सम्मेलन क¢ सातवें दिन वाराणसी से पधारे परम पूज्य संत श्रीश्री1008 स्वामी भावानन्द जी ने श्रद्धालुओं को शिव विवाह प्रसंग सुनाया जिसे सुनकर श्रोता भाव विभोर हो गये। कथा क¢ पश्चात कलाकारो द्वारा प्रस्तुत मांगलिक गीत पर श्रद्धालु देर रात तक थिरकते रहे।
सती प्रसंग सुनाते हुए कथावाचक ने कहा कि जब माता पार्वती भगवान राम की परीक्षा लेकर वापस लौटी और भगवान भोलेनाथ द्वारा पूछने पर झूठ बोल दिया कि ‘ कछु न परीक्षा लीन्ह गोसाई, कीन्हि प्रनाम तुम्हारी नाई’। भगवान सती क¢ झूठ को पकड़ लिया और ध्यान लगाकर देखा तो सती ने सीता का वेश धारण कर भगवान श्रीराम की परीक्षा लिया था। भगवान शिव ने सती से कहा कि तुमने सीता का रूप धारण कर लिया है जिन्हें मैं माता मानता हूं। इस कारण अब मैं तुम्हारा परित्याग करता हूं।
कथा को विस्तार देते हुए भावानन्द ने कहा कि ‘शिव संकल्प कीन्हि मन माही, एहि तन सती भेंट अब नाही’। भगवान क¢ इस शब्द को सुनकर माता सती दुःखी हो गयी। इसक¢ बाद भगवान लगातार 87 हजार वर्षो से समाधिष्ट रहे। ध्यान समाप्त होने पर सती भगवान क¢ बगल बैठना चाही तो उन्होंनें उनका आसन सामने लगवा लिया जिसे देखकर सती को पुराना वृतान्त याद आ गया। कुछ दिनो क¢ बाद राजा प्रजापति द्वारा भगवान शिव को अपमानित करने क¢ लिए एक यज्ञ का आयोजन किया गया। सारे देवताओं को दक्षक प्रजापति ने निमन्त्रण दिया। सारे देवी-देवताओं को पिता क¢ घर यज्ञ में जाते हुए देखकर सती भी भगवान से चलने क¢ लिए आग्रह किया। भगवान ने कहा कि बिना बुलावे क¢ जाना उचित नही है लेकिन सती उनकी बात नही मानी और पिता क¢ घर चली गयी। कथा को विस्तार देते हुए उन्होंनें कहा कि सती यज्ञ मंडल में पहंुची तो सभी देवताओं का आसन लगा हुआ था और भगवान शिव क¢ लिए कोई जगह नही थी। सती यह अपमान बर्दाश्त नही कर सकी और उन्होंनें यज्ञ कुण्ड में कूद कर अपने प्राणो की आहूति दे दिया।
उन्होंनें कहा कि वही सती अगले जन्म में राजा हिमाचंल क¢ घर पार्वती क¢ रूप में पैदा हुई। पार्वती ने भगवान शिव को पाने क¢ लिए कई वर्षो तक कठोर तपस्या किया। तपस्या क¢ दौरान सप्तऋषि क¢ अलावा भगवान भोलेनाथ ने स्वंय उनकी परीक्षा लिया। इस प्रकार भगवान भोलेनाथ एवं पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ। कलाकारो द्वारा प्रस्तुत मांगलिक गीत एवं भजनो पर श्रद्धालु देर रात तक थिरकते रहे। कथा में समिति क¢ अध्यक्ष रामशंकर शुक्ल, श्रीनिवास पाण्डेय, राजाराम शुक्ल, कपिल देव शुक्ल, राम सुरेश, कमला प्रसाद, विजय बहादुर, आनन्द कुमार, पंकज, संजय सिहं, राजू सिहं, छोटू, दरा¢गा तिवारी, अभय पाण्डेय, अभिषेक, मुकुन्द पाण्डेय,शिवाकान्त, दशरथ पाण्डेय, भानू प्रताप सिहं, राम दयाल चैधरी, लड््डन सिहं, कप्तान तिवारी सहित तमाम श्रद्धालु मौजूद रहे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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