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शाकाहारी भोजन की जीवन में विशेष महत्ता है

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 27 मई, आर्य वीर हमेशा राष्ट्रपोषक होता उसका जीवन राष्ट्र के लिए ही समर्पित होता ही है साथ ही वह अपने पुरूषार्थ से देश का अभाव, अन्याय और अंधकार को दूर करता है। उक्त बातें धर्मेन्द्र आर्य प्रशिक्षक ने आर्य वीर दल बस्ती के चरित्र निर्माण चरित्र निर्माण शिविर के बौद्धिक सत्र में कही। भक्ष्याभक्ष्य पर बोलते हुए उन्होने कहा कि शाकाहारी व्यक्ति पूरा जीवन शाकाहारी रह सकता है पर मांसाहारी व्यक्ति बिना शाकाहार के मांसाहार भी नहीं कर सकता। शाकाहार सात्विक विचार को जन्म देता है जबकि मांसाहार से दुर्विचार आतें हैं। इससे पूर्व शिविर के सातवें दिन बच्चों के द्वारा अब तक अर्जित ज्ञान की परीक्षा आर्य वीर दल पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रशिक्षक धर्मेन्द्र आर्य के सानिध्य में सम्पन्न हुई। इसी कघ्ी में प्रशिक्षक दिनेश कुमार आर्य ने कहा कि आर्य संस्कृति का मूल वेद है, इसलिए इसे वैदिक संस्कृति भी कह सकते है। यह वैदिक संस्कृति ही सबसें प्रथम और सबके लिए वरण करने योग्य है।
उन्होने सात्विक भोजन, संयम, प्राणायाम, प्रातःजागरण, सत्संग, स्वध्याय, प्रसन्नता एवं जप को बुद्धि विकास का साधन बताया। इससे पूर्व शिविर के सातवें दिन बच्चों के द्वारा अब तक अर्जित ज्ञान की परीक्षा आर्य वीर दल पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रशिक्षक धर्मेन्द्र आर्य के सानिध्य में सम्पन्न हुई। यज्ञ कराते हुए दिनेश आर्य, पं0 अनिल कुमार ने ईश्वर स्तुति, प्रार्थना व उपासना के बारे में बच्चों को बताया तथा यज्ञ को ही जीवन का आधार बताते हुए कहा कि यज्ञ से सभी उत्तम फल प्राप्त होते हैं।
शारीररिक व्यायाम के क्रम में आर्य वीरों को आत्मारक्षा के लिए जूडो, लाठी, दण्ड एवं बैठकों का प्रशिक्षण दिया गया साथ ही परिामिड व स्तूप निर्माण के साथ साथ शीर्षसन, हलासन, मकरासन, भुजंगासन, वज्रासन, सुप्तबज्रासन, दण्डासन, शलभासन, वक्रासन,मयूरासन का विधिवत अभ्यास कराते हुए प्रशिक्षक विनय कुमार आर्य ने अपने देश के विकास एवं रक्षा के लिए इसका प्रयोग करने का संकल्प दिलाया।
शिविर में अभिभावक की भूमिका अदा कर रहे वेद कुमार आर्य ने कहा कि बच्चों में वैदिक ज्ञान के प्रति रुचि रुझान को देखते हुए जल्दी ही इस प्रकार के और शिविर जिले व तहसीलों में लगाये जाने चाहिए ताकि देश के नवयुवकों को सही व नई दिशा मिल सके। भोजन मंत्र बोलकर अन्नदान करने वालों के प्रति कृतज्ञता भाव की प्रेरणा देते हुए उन्होने कहा कि एक अन्न का दाना पैदा करने में मिट्टी, किसान व भगवान के अलावा करोडों सूक्ष्म जीव जन्तुओं का विशेष योगदान होता है। इसलिए अन्न का एक दाना भी बेकार फेंकना पाप तो होता ही है साथ ही किसान व दानदाता का भी अपमान होता है। ज्ञात हो कि भोजन का सदुपयोग करने की प्रेरणा देने के साथ ही भेजनोपरांत बच्चों की थाली का निरीक्षण किया जाता है जिससें अन्न का एक कण भी फेंका न जाय।
बच्चों में सेवा व व्यक्तिगत स्वच्छता के भाव पैदा करने के लिए उन्हें सफाई व सुरक्षा पहरे पर भी लगाया जाता है जिसे आर्यवीर उत्साहपूर्वक करते हैं। इस अवसर पर शिविर संचालक देवव्रत आर्य ने बताया कि 28 मई को प्रातः कालीन यज्ञ सत्र में आर्यवीरों का उपनयन संस्कार किया जायेगा तथा सायंकालीन सत्र में शौर्य प्रदर्शन के साथ समापन होगा। बच्चों के भोजन जलपान में के पी श्रीवास्तव, सरोज त्रिपाठी, निर्मला, नवल किशोर चैधरी, पंकज त्रिपाठी, विश्वनाथ आर्य, राजेन्द्र जायसवाल आदि ने सहयोग किया।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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