आज की ताजा खबर

शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
संतकबीरनगर 23 मार्च, आज शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का शहादत दिवस है। जंग-ए-आजादी के इन दीवानों और अदम्य साहसी क्रांतिकारियों को आज ही साम्राज्यवादी ब्रिटिश उपनिवेशवादियों ने फांसी पर चढ़ा दिया था।
भगत सिंह सहित तीनों क्रांतिकारी साथियों ने हंसते हंसते यह कहते हुए फांसी का फंदा चूमा था कि उसे यह फिक्र है हरदम नया तर्जे जफा क्या है, हमें यह शौक है देखें सितम की इंतहा क्या है।
कोई दम का मेहमां हूं ऐ अहले महफिल, चराग-ए-सहर हूं बुझा चाहता हूं हवा में रहेगी मेरे खयाल की खुशबू, ये मुश्त-ए-खाक है फानी रहे न रहे। मात्र 23 साल की छोटी सी उम्र में दुनिया के कई देशों की क्रांतियों के इतिहास और उनके सबक सीखकर शोषण विहीन, समतामूलक, समाजवादी शासन व्यवस्था जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा की रक्षा हो और व्यक्ति से व्यक्ति का और देश से देश का शोषण न हो।
सांप्रदायिकता व जातिवाद तथा साम्राज्यवाद का खात्मा करने के उद्देश्य को लेकर उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया। आजकल उन्हें केसरिया पगड़ी पहने फोटोज में दिखाया जाता है और उनके नाम पर घडि़याली आंसू बहाने का नाटक किया जा रहा है।
भगत सिंह के दर्शन को नष्ट भ्रष्ट करने की नापाक कोशिशें हो रही हैं। अपने उसूलों के साथ कोई समझौता न करने वाले महान क्रांतिकारी के साथ यह असहनीय अन्याय है। ऐसे आस्तीन के सांपों को पहचानना होगा और भगत सिंह के दर्शन को वास्तविक रूप में स्थापित करना होगा। यह उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

About The Author

अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enter the text from the image below