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वर्मी कम्पोस्ट सर्वोत्तम जैविक खाद

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर) 20 फरवरी, केंचुवा मिट्टी को खाकर उसे लुगदी बनाने का काम करते है। इसके द्वारा उत्सर्जित भुरभुरी मिट्टी काफी उपजाऊ हो जाती है। इसलिए केचुआ को किसान मित्र भी कहा जाता है। वर्मी कम्पोस्ट वर्तमान समय में केचूओ से तैयार होने वाली सर्वोत्तम जैविक खाद है। यह किसानों की रासायनिक उर्वको पर निर्भरता कम तथा हानि रहित उत्तम जैविक कृषि उत्पादन प्राप्त करने में लाभदायक होता है।
उक्त जानकारी कृषि विज्ञान केन्द्र सोहना के वैज्ञानिक डा0 एक0के0 मिश्रा, ने देते हुए बताया कि वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए पेड़ के नीचे बगीचे में या पुआल से बने छायादार स्थान में होना चाहिए। निर्धारित माप का गड्डा बनाकर उसमें नियमानुसार सामग्री की भरायी भी करनी चाहिए । इसमें उपयुक्त प्रजाति का केचुआ कम्पोस्ट बनाने के लिए डालना चाहिए।
केचुए कुडे के ढेर के नीचे कम्पोस्ट बनाते समय ऊपर की ओर बढाते है। जब गड्डे की खाद तैयार हो जाए तब ऊपर की ओर कूडे एवं कचरे की नई ढेर पुनः लगा देेते है। तथा इसके ऊपर पानी का छिड़काव करके इसे नम कर देतंे है। इस तरह करने से सभी केचुएं आकर्षित हो जाते है।
इसे इकट्ठा करके दूसरे गड्डे में अंतक्रमण के लिए प्रयोग करते है। अन्य जीवांश खादों की तुलना में वर्मी कम्पोस्ट में अत्याधिक मात्रा में पोषक तत्व उपलब्ध होते है। नाईट्रोजन फास्फोरस तथा पोटास के अतिरिक्त इसमें द्वितीय तथा सूक्ष्म तत्व भी मौजूद रहते है। वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग धान्य फसलों, तिलहन, सब्जियों की खेती में किया जाता है। फलदार वृक्षों में 200 ग्राम प्रति पौधें की दर से प्रयोग करना अधिक फायंदेमंद होगा। उन्होने कहा कि वर्मी कम्पोस्ट मृदा स्वास्थ को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण उपाय भी है। इससे मृदा के भौतिक तथा जैविक गुणों में सुधार होगा। मृदा संरचना तथा सरंचना मंे सुधार भी होगा।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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