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लोकार्पण समारोह सम्पन्न

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 20 फरवरी, साहित्य के बिना संवेदना और मनुष्यता की रक्षा संभव नही है। यह विचार डाॅ. संजयन त्रिपाठी ने व्यक्त किया। वे शनिवार को प्रेस क्लब में सर्वेन्द्र नारायण द्विवेदी कृत ‘कालामृतम्’ के लोकार्पण अवसर पर आयोजित समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे।
कहा कि समय, काल, परिस्थिति के अनुरूप साहित्य की दिशा दृष्टि बदलती है किन्तु उसके मूल केन्द्र में मनुष्य की जीजिविषा, जीवन संघर्ष सदैव बना रहेगा।
अध्यक्षता करते हुये राजेन्द्रनाथ तिवारी ने कहा कि ‘कालामृतम्’ की कवितायें आज के युगबोध को अभिव्यक्ति देती है। कवि की बेचैनी, छटपटाहट और उत्कंठा में ‘आत्मा’, जीवन का धर्म जैसी रचना साहस और संदेश देती हैं।
इस अवसर पर पत्रकार विनोद उपाध्याय के संचालन में अशोक कुमार सिंह, राममणि शुक्ल, सत्येन्द्रनाथ मतवाला, श्याम प्रकाश शर्मा, प्रदीप चन्द्र पाण्डेय, शिवपाल सिंह, शांति भूषण त्रिपाठी, रामानन्द, शायर सलीम वस्तवी, आदि ने ‘कालामृतम्’ के विमोचन अवसर पर साहित्य के अनेक सरोकारों, बदलते सन्दर्भ व स्थितयों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
‘कालामृतम्’ के रचयिता सर्वेन्द्र नारायण द्विवेदी ने अतिथियों, साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुये कहा कि संघर्ष में ही रचना और भविष्य छिपा है। रचनाओं में जीवन दर्शन के विभिन्न पक्ष की अनुभूतियां मिलेंगी। प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र गुप्त ने कहा कि साहित्य और पत्रकारिता एक दूसरे के पूरक हैं।
इस अवसर पर अरविन्द दूबे, जटाशंकर मिश्र, मनीष राज, लालजी दूबे, राजेश तिवारी, विवेक श्रीवास्तव, संजय प्रजापति, जान पाण्डेय, रवि गुप्ता, डा. फारूक अवैदुल्लाह, रीतेष श्रीवास्तव के साथ ही अनेक साहित्य प्रेमी, मर्मज्ञ उपस्थित रहे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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