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लोकसभा चुनाव क्षेत्र 61 बस्ती मे त्रिकोणात्मक लड़ाई के आसार

अनुराग कुमार श्रीवास्तव
विचारपरक संवाददाता
बस्ती 10 मई, उत्तर प्रदेश के 61 लोकसभा क्षेत्र बस्ती सीट पर चुनाव छठे चरण मे 12 मई को संपन्न होना है। इस चुनाव मे 11 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे है।
लोकसभा के इस चुनाव मे तीन राजनीतिक दिग्गजों की प्रतिष्ठा जहां दांव पर लगी है वहीं मतदाताओं की खामोशी इन दिग्गजों और उनके समर्थकों की बेचैनी बढ़ा रही है
लोकसभा के इस चुनाव मे मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के हरीश द्विवेदी, महागठबंधन के राम प्रसाद चैधरी और कांग्रेस के राज किशोर सिंह के बीच होने के आसार हैं. लोकसभा चुनाव मे 18 लाख 31 हजार 6 सौ 66 मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। इसमे 9 लाख 90 हजार 1 सौ 84 पुरूष तथा 8 लाख 90 हजार 1 सौ 84 महिला मतदाता समलित है।
लोकसभा के पिछले चुनाव के दौरान इन्हीं तीनों राजनीतिक दिग्गजों के बीच हुए मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी के हरीश द्विवेदी ने समाजवादी पार्टी के ब्रज किशोर सिंह को 33562 मतों से हराकर जीत दर्ज की थी बहुजन समाज पार्टी के राम प्रसाद चैधरी तीसरे स्थान पर चले गए थे. तब प्रदेश सरकार में मंत्री रहे दिग्गज समाजवादी पार्टी नेता राज किशोर सिंह ने अपने छोटे भाई ब्रजकिशोर सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था.
लोकसभा के इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी हरीश द्विवेदी जहां मोदी सरकार की 5 साल की उपलब्धियों और क्षेत्र में अपने द्वारा कराए गए विकास कार्यों के बूते दोबारा लोकसभा में पहुंचने के प्रयास में हैं वहीं महागठबंधन के बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी राम प्रसाद चैधरी दलित, पिछड़ों और मुस्लिमों के मजबूत जातीय गठजोड़ के चलते मैदान में मजबूती से डटे हुए हैं. राम प्रसाद चैधरी 5 बार इसी संसदीय क्षेत्र की कप्तानगंज विधानसभा सीट से विधायक और 1989 में जनता दल के उम्मीदवार के तौर पर संत कबीर नगर संसदीय सीट से सांसद रहने के अलावा प्रदेश सरकार में कई बार मंत्री भी रह चुके हैं.
इस क्षेत्र मे कुर्मी विरादरी के प्रमुख नेता है।
समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता रहे पूर्व मंत्री राज किशोर सिंह भी इसी संसदीय क्षेत्र की हरैया विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक रह चुके हैं. कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतर कर मुकाबले को काफी रोचक और दिलचस्प बना दिया है.
तीनों राजनीतिक दिग्गजों का चुनाव प्रचार चरम पर पहुंच चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी उम्मीदवार हरीश द्विवेदी और बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती पार्टी उम्मीदवार राम प्रसाद चैधरी के समर्थन में चुनावी रैलियां कर चुके हैं जबकि कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी की राज किशोर सिंह के समर्थन में चुनावी रैली को 10 मई शुक्रवार को सम्बोधित कर चुकी है।
लोकसभा के इस मे चुनाव प्रचार में स्थानीय मुद्दे पूरी तरह गायब हैं जातिवाद और धर्म के मुद्दे के ही प्रभावी नजर आने से उम्मीदवारों द्वारा मतदाताओं को रिझाने के लिए हर हथकंडे अपनाए जाने के बाद भी मतदाताओ उनकी खामोशी न टूटने से उम्मीदवार और समर्थक सभी परेशान हैं.
जिले की प्रमुख समस्या बढ़, बेरोजगारी, चीनी मिलों की बंदी, प्लास्टिक कांप्लेक्स की बदहाली और नए उद्योगों की स्थापना न होने से बेरोजगारों का महानगरों को पलायन जारी है।
आजादी के बाद इस संसदीय सीट पर हुए 17 लोकसभा चुनाव के दौरान तीन दशकों तक कांग्रेस पार्टी का दबदबा कायम रहा लेकिन समय बदलने के साथ कांग्रेस पार्टी की पकड़ कमजोर होती चली गई और अब वह अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रही है जबकि भारतीय जनता पार्टी अब तक इस सीट पर 5 बार जीत का परचम लहराने के बाद छठी बार परचम लहराने के लिए चुनाव मैदान में है. दो बार जीत का परचम लहरा चुकी बहुजन समाज पार्टी समाजवादी पार्टी से महागठबंधन करने के बाद तीसरी बार पार्टी का परचम लहराने के लिए मजबूती से चुनाव मैदान में जुटे है।
लोकसभा के इस चुनाव मे मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी, जिलाधिकारी डाॅ0 राज शेखर के नेतृत्व मे बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। इससे मतदान प्रतिशत बढ़ने के असार है।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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