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रोचक दौर में बढ़नी प्रमुख के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव

अभिषेक श्रीवास्तव/श्रवण पटवा
विचारपरक संवाददाता
शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर) 9 जुलाई, जनपद में ब्लाक प्रमुखों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का दौर चल रहा है।नौगढ़ और मिठवल में मौजूदा ब्लाक प्रमुखों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सफल भी हो गया।
अब सोमवार को बढ़नी ब्लाक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सत्तापक्ष ला रही है।दोनों तरफ से जोर-अजमाईस चल रही है।एक तरफ से भाजपा सांसद और शोहरतगढ़ विधायक ने प्रतिष्ठा लगा रखी है तो वहीं दूसरी तरफ से दो पूर्व विधायक लगे हुए हैं।
मौजूदा ब्लाक प्रमुख के समर्थकों का कहना है कि उनके पास पर्याप्त क्षेत्र पंचायत सदस्यों का समर्थन प्राप्त है लेकिन सत्तापक्ष अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहा है।
उन्होंने जिलाधिकारी से निष्पक्ष कार्य करवाने की मांग किया है।
नौगढ़ और मिठवल के बाद सत्तापक्ष बढ़नी ब्लाक प्रमुख की कुर्सी छीनने के लिए पूरा जोर लगाये हुए है।गत वर्ष हुए बढ़नी ब्लाक प्रमुख के चुनाव में सत्ताधारी सपा समर्थित विफई देवी ने अपनी प्रतिद्वंदी शांति पासवान को आठ मतों से पराजित किया था।
बढ़नी ब्लाक में कुल 73 क्षेत्र पंचायत सदस्य हैं और विफई देवी को 40 सदस्यों का और शांति पासवान को 32 सदस्यों का समर्थन प्राप्त था।
जैसे ही प्रदेश में सत्ता परिवर्तित हुई तो बढ़नी में भी तख्तापलटने के लिए सत्तापक्ष ने पूरा जोर लगा दिया।
सूत्रों के मुताबिक अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए 37 क्षेत्र पंचायत सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता है और दोनों ही पक्ष अपने पास पर्याप्त संख्या-बल होने का दावा कर रहे हैं।
एक पक्ष से सत्ताधारी दल के सांसद और विधायक ने अपना पूरा बल लगा दिया है तो दूसरी तरफ मौजूदा ब्लाक प्रमुख की तरफ से दो पूर्व विधायक लगे हुए है।
कुल मिलाकर बढ़नी ब्लाक प्रमुख की कुर्सी की जंग अब अपने रोचक दौर में पहुंच चुकी है।
जानकारों के मुताबिक बढ़नी की स्थिति नौगढ़ और मिठवल से अलग है।नौगढ़ और मिठवल में तो अविश्वास प्रस्ताव एकतरफा पारित हो गया था परन्तु बढ़नी में ऊंट किस करवट बैठेगा ये कोई नहीं कह सकता।
बढ़नी ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि प्रदीप कुमार पथरकटट ने बताया है कि हमारे समर्थकों को सत्ता के बल से धमकाया जा रहा है।अभी कुछ दिन पहले ही हमारे पक्ष के दो लोगों के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज करवाया गया।हमारे पास पर्याप्त संख्या-बल है।
हमें सोमवार को होने वाले अविश्वास-प्रस्ताव में सत्तापक्ष के दबाव में गड़बड़ी की आशंका है।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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