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राष्ट्र रक्षा में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है-राजेन्द्रनाथ तिवारी

राष्ट्र रक्षा में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है-राजेन्द्रनाथ तिवारी

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 3 दिसम्बर, आर्य वीर दल शौर्य प्रदर्शन व राष्ट्र रक्षा में युवाओं की भूमिका विषयक परिचर्चा के साथ आर्य समाज नई बाजार बस्ती का 46वां वार्षिकोत्सव सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि राजेन्द्रनाथ तिवारी अध्यक्ष पूर्वांचल विद्वत परिषद उत्तर प्रदेश ने आर्य वीरों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आर्य वीर और वीरांगनाओं ने प्राचीनकाल से ही राष्ट्र रक्षा में अपने जीवन की आहुति दी है। वैदिक संस्कृति का ज्ञान प्राप्त करके ही वशिष्ठ आश्रम में राम, संदीपनी आश्रम में श्रीकृष्ण और चाणक्य आश्रम में चन्द्रगुप्त आदि का निर्माण होता है जिन्होने अपने ज्ञानबल से अज्ञान, क्षात्रबल से अन्याय व धनबल से अभाव को दूर किया है।
उन्होने माना कि आज देश में ऐसे चरित्रवान युवाओं की आवश्यकता है। इस अवसर पर पत्रकार पंकज त्रिपाठी ने कहा कि आर्य वीर सच्चरित्र व राष्ट्रभक्त होता है जो अपने सुकर्म से सबको अनुप्राणित करता रहता है। समाज सेवी नन्दकिशोर साहू ने कहा आर्य वीर दल से बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास तो होता ही है साथ ही पारस्परिक सहयोग की भावना विकसित होती है। वैद्य संजय दूबे ने आर्य वीर वीरांगनाओं के शौर्य प्रदर्शन को चिकित्सा का अंग मानते हुए कहा कि इनके शैर्य प्रदर्शन से न केवल शारीरिक बल्कि आत्मिक उन्नति भी होती है। इससे पूर्व राष्ट्रीय प्रशिक्षक दिनेश आर्य के निर्देशन में आर्य वीरों व वीरांगनाओं ने अतिथियों के सम्मुख सर्वांग सुन्दर व्यायाम, नियुद्धम, शूल फेंक, लाठी द्वन्द्व, नानचक्र, मानव पुल,स्तूप निर्माण व आॅख पर पट्टी बाॅधकर लाठी राजस्थानी ऊँट, हेलीकाप्टर चलाना आदि कलाओं का प्रदर्शन लोगों को वैदिक संस्कृति का कायल बना दिया। आर्य वीरों में श्याम नारायण, माधव व रोहन आर्य को प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया और वीरांगनाओं में आसना, अनामिका, दुर्गा, ने प्रथम द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया।
आदित्य आर्य को सर्वश्रेष्ठ आर्य वीर सम्मान से विभषित किया गया। ओंकार आर्य द्वारा प्रशिक्षक दिनेश आर्य को शाल ओढ़ाकर सम्मान किया। इस अवसर पर सभा में उपस्थित सबसे बड़े आर्य रामशंकर मुनि वानप्रस्थी व फूलमती देवी को सममानित किया गया। इस अवसर पर अल्का शास्त्री, पं0 राम मगन, आचार्य शैलेन्द्र शास्त्री एंव महावीर मुमुक्षु आदि विद्वानों ने आर्य वीरों व वीरांगनाओं की समाज में उपयोगिता पर बल दिया। वेद प्रचार के लिए इन्ही युवकों की आवश्यकता है। ओम प्रकाश आर्य ने महाराणा प्रताप की गौरव गाथा सुनाकर श्रोताओं को देशभक्ति से सराबोर कर दिया। संचालकीय उद्बोधन में में कहा कि आज देश में जितने घोटाले हुए है उन सबका मूल वैदिक संस्कृति से भटकाव ही है। यदि हम अपनी इस वैदिक संस्कृति की पहचान खोने का प्रयास करेंगें तो हम समाप्त हो जायेगें ऐसा उद्घोष करते हुए महर्षि दयानन्द सरस्वती ने वेदों की ओर लौटो का नारा देते हुए स्वदेशी का शंखनाद किया।
उनके इस आवाहन पर पूरा देश एक हो गया और क्रंान्तिकारियों की एक लम्बी फौज तैयार हो गयी। आर्य वीर दल पूरे मनोयोग से वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार करता रहेगा। अंत में ओम प्रकाश आर्य ने कार्यक्रम में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से सहयोगी लोगों के प्रति हृदय से आभार प्रकट किया। रचित आर्य, ओंकार आर्य, इस अवसर पर आदित्य नारायण गिरि, सत्येन्द्र वर्मा, अंकित मद्धेशिया, देवव्रत आर्य, सुमन आर्य, द्रौपदी देवी, कंचनलता आर्य, रश्मि आर्य, रजनी आर्य, वशिष्ठ गोयल, नमन गोयल, लक्ष्मी प्रसाद, बीना देवी, दिलीप कसौधन, सुभाष चन्द्र आर्य, गोपेश्वर त्रिपाठी, आनन्दस्वरूप, ओंकार आर्य, राधेश्याम आर्य, हरीराम आर्य आनन्द श्रीवास्तव, बृजेश श्रीवास्तव, मनोज कुमार, विश्वनाथ, चुनमुन लाल, राजेन्द्र जायसवाल, रामबाबू, उपेन्द्र आर्य, शिवेन्द्र मोहन पाण्डेय, नमन गोयल, प्रमोद कुमार सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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