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राष्ट्र की रक्षा के लिए प्राचीनकाल से ही आर्यवीर और वीरांगनओ ने जीनव की आहुति दिया है

(विचारपरक प्रतिनिधि द्धारा)
बस्ती 6 नवम्बर , आर्य वीर दल शौर्य प्रदर्शन व राष्ट्र रक्षा में युवाओं की भूमिका विषयक परिचर्चा के साथ आर्य समाज नई बाजार बस्ती का 44वां वार्षिकोत्सव सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि भिखारी प्रजापति प्रदेश अध्यक्ष विश्व हिन्दू महासंघ उत्तर प्रदेश ने आर्य वीरों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आर्य वीर और वीरांगनाओं ने प्राचीनकाल से ही राष्ट्र रक्षा में अपने जीवन की आहुति दिया है इनसे ही वैदिक संस्कृति जीवित रही है कभी धु्रव के रूप में कभी शंकराचार्य के रूप में तो कभी दयानन्द, श्रद्धानन्द व महात्मा हंसराज के रूप में आर्य वीर उत्पन्न होकर राष्ट्र को अनार्यों से बचाया है। उन्होने माना कि आज देश में ऐसे चरित्रवान युवाओं की आवश्यकता है।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि व वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र नाथ तिवारी ने कहा कि स्वराज्य के प्रथम उद्घोषक जिनको पट्टाभिसीतारमैया राष्ट्रपितामह की पदवी देना चाहते थे उन्होने आर्य समाज की स्थापना कर वैदिक संस्कृति में प्राण फूँक दिया। देश ने यदि उनके विचारों को आत्मसात किया होता तो आज समाज में कोई जाति नहीं होती बल्कि एक वर्ण व्यवस्था काम कर रही होती। आर्य वीर सच्चरित्र व राष्ट्रभक्त होता है जो अपने सुकर्म से सबको अनुप्राणित करता रहता है। हिजाम जिलाध्यक्ष नंदीश्वर दत्त ओझा एवं प्रवक्ता विकास बरनवाल ने बताया कि आर्य वीर दल से बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास तो होता ही है साथ ही पारस्परिक सहयोग की भावना विकसित होती है। इससे पूर्व राष्ट्रीय प्रशिक्षक दिनेश आर्य के निर्देशन में आर्य वीरों व वीरांगनाओं ने अतिथियों के सम्मुख सर्वांग सुन्दर व्यायाम, नियुद्धम, शूल फेंक, लाठी द्वन्द्व, नानचक्र, मानव पुल,स्तूप निर्माण व आॅख पर पट्टी बाॅधकर लाठी चलाना आदि कलाओं का प्रदर्शन लोगों को वैदिक संस्कृति का कायल बना दिया। इस अवसर पर सभा में उपस्थित सबसे बडे आर्य वीर मदनमोहन आर्य को सम्मनित किया गया।ओम प्रकाश आर्य ने संचालकीय उद्बोधन में में कहा कि आज देश में जितने घोटाले हुए है उन सबका मूल वैदिक संस्कृति से भटकाव ही है। यदि हम अपनी इस वैदिक संस्कृति की पहचान खोने का प्रयास करेंगें तो हम समाप्त हो जायेगें ऐसा उद्घोष करते हुए महर्षि दयानन्द सरस्वती ने वेदों की ओर लौटो का नारा देते हुए स्वदेशी का शंखनाद किया। उनके इस आवाहन पर पूरा देश एक हो गया और क्रंान्तिकारियों की एक लम्बी फौज तैयार हो गयी। आर्य वीर दल पूरे मनोयोग से वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार करता रहेगा। अंत में ओम प्रकाश आर्य ने कार्यक्रम में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से सहयोगी लोगों के प्रति हृदय से आभार प्रकट किया।
इस अवसर पर आदित्य नाराण गिरि, देवव्रत आर्य, सुमन आर्य, द्रौपदी देवी, कंचनलता आर्य, रश्मि आर्य, रजनी आर्य, राम मोहन पाल, नवीन श्रीवास्तव, वशिष्ठ गोयल, नमन गोयल, लक्ष्मी प्रसाद, बीना देवी, कलावती शर्मा अरविन्द रीना श्रीवास्तव, दिलीप कसौधन, किरन कसौधन, राजेश पाल, अयोध्या प्रसाद, कुलदीप सिंह, सुभाष चन्द्र आर्य, परमात्मा प्रसाद शर्मा, गोपेश्वर त्रिपाठी, दिवाकर मिश्र, अमरेश पाण्डेय, मदनमोहन आर्य, अलख निरंजन, आनन्दस्वरूप, ओंकार आर्य, राधेश्याम आर्य, हरीराम आर्य प्रवीण अग्रवाल, आनन्द श्रीवास्तव, बृजेश श्रीवास्तव, चन्द्रभषण चतुर्वेदी, मनोज कुमार, विश्वनाथ, चुनमुन लाल, राजेन्द्र जायसवाल, दिलीप कसौधन, रामबाबू, समीर बरनवाल, सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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