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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का द्विवार्षिक अधिवेशन सम्पन्न

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 28 मई, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश की जनपद शाखा का द्विवार्षिक अधिवेशन विकास भवन सभागार में सम्पन्न हुआ। अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार राय ने दीप जलाकर कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत की। अपने संक्षिप्त सम्बोधन में उन्होने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य करने के लिये अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच समन्वय जरूरी है। समस्याओं के समाधान का यही सकारात्मक माध्यम है, रही बात कर्मचारियों के समस्याओं की तो एक एक कर सभी का निदान किया जायेगा।
उन्होने कहा कर्मचारियों का उत्पीड़न किसी भी दशा में नही होने दिया जायेगा। उन्होने कमचारियां को भरोसा दिलाया कि उनका दरवाजा हमेशा उनके लिये खुला रहेगा और जायज समस्याओं के निदान के लिये हर संभव कोशिश की जायेगी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रान्तीय उपाध्यक्ष ओपी सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के पास राज्य कर्मचारियों की अनेक मांगे लम्बित हैं नई सरकार के सत्ता में आये अभी करीब ढाई महीने हुये हैं, ऐसे में परिषद अभी सरकार के फैसलों की प्रतीक्षा कर रहा है। समय रहते मागें पूरी नही हुई और कर्मचारियों की जायज जरूरतों की अनदेखी की गयी तो पूरे प्रदेश में कर्मचारी धरना प्रदर्शन की राह अख्तियार करेंगे। उन्होने संगठन में एका बनाये रखने पर जोर दिया। कहा एका से ही संगठन की ताकत का अहसास होता है और हमारे संघर्षों को मुकाम मिलता है।
अधिवेशन के प्रथम सत्र में में दो वर्ष के भीतर संगठन द्वारा कर्मचारियों के हित में किये गये धरना प्रदर्शन आदि कार्यक्रमों के सफल आयोजन पर चर्चा हुई, साथ ही दो वर्षों के आय व्यय का व्योरा भी कोषाध्यक्ष ने सदन के समक्ष प्रस्तुत किया।
सम्प्रेक्षक ने संतुष्टि जाहिर करते हुये कहा कि कोष ही संगठन की ताकत है। इस अवसर पर परिषद के उपाध्यक्ष राम अधार पाल ने राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की ओर से तैयार 14 सूत्रीय प्रस्ताव को अपर जिलाधिकारी की मौजूदगी में सदन के सामने पढ़कर सुनाया। उत्तर प्रदेश सरकार स्टेनोग्राफर महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाण्डेय, कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रियल कर्मचारी संघ के प्रदेश संयुक्त मंत्री अशोक मिश्रा, मण्डल अध्यक्ष प्रताप नारायण शुक्ला ने अपने सम्बोधन में प्रदेश सरकार को कर्मचारी विरोधी बताया, कहा सरकार का रवैया कर्मचारियों की लम्बित मागों को लेकर उदासीन है, संगठन नई सरकार को पर्याप्त समय देना चाहता है, समय भीतर नतीजे न आने पर आन्दोलन की राह तय है।
पदाधिकारियों ने यह भी कहा 2013 में योगी आदित्यनाथ ने बतौर सांसद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र भेजकर अंशदायी पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल किये जाने की सिफारिश की थी। आज वे मुख्यमंत्री हैं बावजूद इसके कर्मचारियों को पूरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने के लिये संघर्ष करना पड़ रहा है।
अधिवेशन के द्वितीय सत्र में पदाधिकारियों का सर्वसम्मति से चयन किया गया। चुनाव प्रक्रिया कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ उ.प्र. के प्रान्तीय संयुक्त मंत्री अशोक कुमार मिश्रा की देखरेख में सम्पन्न हुआ। विभिन्न विभागों के कर्मवारियों की मौजूदगी में मस्तराम वर्मा जिला अध्यक्ष, राम अधार पाल पाल जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष, तौलू प्रसाद जिला मंत्री तथा मनोज कुमार यादव को सर्वसम्मति से सम्प्रेक्षक चुना गया। खास बात ये रही कि इन पदाधिकारियों के विरोध में किसी कर्मचारी ने चुनाव लड़ने की इच्छा नही जतायी।
राम अधार पाल को नौवीं बार वरिष्ठ उपाध्यक्ष चुना गया।
इस अवसर पर कोषागार कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अखिलेश पाठक, एमडब्लू अंसारी, प्रमोद शुक्ला, संतोष राव, अमरेश श्रीवास्तव, मुकेश सोनकर, अजीत सिंह, परमात्मा प्रसाद, मनोज यादव, मो. कलीम, अजय आर्य, अमरनाथ गौतम, मालती पाण्डेय, मंजू सिंह पाल, राजेश यादव, विश्वदेव दूबे, विमल आनंद, अरूणेश पाल, राकेश श्रीवास्तव, अजय यादव, कौशल कुमार, रियासत अली, रामसमुेर, राकेश पांडे, सुग्रीव भारती, जवाहर लाल, अमर मणि त्रिपाठी, राजेन्द्र चैधरी सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी उपस्थित थे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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