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राजनीति ने पिता पुत्र को आमने -सामने खडाकर दिया

AKHILESH With Mulayam Singh Yadav

(आलोक कुमार श्रीवास्तव)
राजनीति में कुछ भी सम्भव है उचित अनुचित निर्णय समय के हिसाब से बदलता रहता है। किसी ने कभी सोचा नही था कि समाजवादी पार्टी पिता पुत्रकी लड़ाई दो खेमों में बंट जायेगी।
समाजवादी पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव नें अपने बेटे अखिलेश सिंह यादव को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद केन्द्र की राजनीति में उतारा था। उनकी मंशा रही
होगी कि बेटा एम0 पी0 बनकर देश की राजनीति में सक्रिय रहेगा। समय ने एम0 पी0 बनने के बाद भी अखिलेश यादव को प्रदेश की राजनीति में केन्द्रीय राजनीति से वापस उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुला लिया। समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने पहले अखिलेश यादव को प्रदेश सपा अध्यक्ष का दायित्व सौंपा और विधानसभा चुनाव 2012 में पूर्ण बहुमत प्राप्त करने के बाद अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का दायित्व सौंप कर उन्हें समाजवादी पार्टी का कद्दार और जिम्मेंदार नेता के रूप में स्थापित कर दिया। मुलायम सिंह यादव ने पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे अपने सगे भाई शिवपाल सिंह यादव को तरजीह न देकर समाज और पार्टी को यह संदेश दिया था कि मुलायम सिंह यादव के बाद अखिलेश यादव ही पार्टी के सर्वशक्तिमान नेता है।
मुलायम सिंह के इस निर्णय से शिवपाल यादव अन्तरमन से दुखित तो थे लेकिन बड़े भाई मुलायम सिंह के गौरव गरिमा का ध्यान रखते हुए उन्होंने कभी भी अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने का बिरोध नही किया था समय ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच धीरे-धीरे इतना मतभेद बढ़ा दिया कि
11 जून 2016 शिवपाल यादव ने माफिया से राजनेता बने मुख्तार अंसारी की कौमी एकता दल (कौएद) का सपा मे विलय का एलान किया। 22 जून 2016 नाराज मुख्मंत्री अखिलेश ने कौएद के विलय महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बलराम यादव को मंत्रिमंडल से निकाला। 25 जून 2016 अखिलेश की नाराजगी के बाद संसदीय बोर्ड की बैठक हुई और कौएद का विलय रद। 14 आगस्त 2016 शिवपाल ने कहा अफसर बात नही सुनते, जमीनो पर कब्जे हो रहे है। माफिया पर कार्रवाई नही हुई तो मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे देंगे
15 आगस्त 2016 मुलायम ने कहा अगर शिवपाल इस्तीफा देंगे तो पार्टी की ऐसी-तैसी होगी। 12 सितंबर 2016 अखिलेश ने भ्रष्टाचार के आरोप मे गायत्री प्रजापति और राजकिशोर को मंत्रिमंडल से निकाला। 13 सितंबर 2016 अखिलेश ने मुख्य सचिव दीपक ंिसंघल को हटाया। 13 सितंबर 2016 मुलायम ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के स्थान पर शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। 13 सितंबर 2016 मुख्यमंत्री अखिलेश ने चाचा शिवपाल से तीन मंत्रालय छीन लिए। 14 सितंबर 2016 अखिलेश ने कहा, झगड़ा परिवार का नही सरकार का।
14 सितंबर 2016 अखिलेश ने कहा कलह की वजह बाहरी लोगो का दखल, इशारा अमर सिंह की ओर था। 15 सितंबर 2016 शिवपाल यादव ने सभी पदो से इस्तीफा भेजा, इस्तीफा वापस हुआ। 23 अक्टूबर 2016 मुख्यमंत्री अखिलेश ने शिवपाल को मंत्रिमंडल से बर्खास्तद किया। 23 अक्टूबर 2016 मुलायम ने राम गोपाल को पार्टी से निकाला। 27 दिसम्बर 2016 शिवपाल यादव ने विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियो की सूची जारी की।
29 दिसम्बर 2016 अखिलेश यादव ने 235 प्रत्याशियो की अपनी सूची जारी की।
1 जनवरी 2017 विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन मे अखिलेश यादव को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। 1 जनवरी 2017 मुलायम सिंह ने रामगोपाल यादव, किरन मय नंदा, नरेश अग्रवाल को पार्टी से निकाला। 2 जनवरी 2017 मामला चुनाव आयोग पहुंची 16 जनवरी 2017 चुनाव आयोग ने साइकिल निशान व पार्टी पर अखिलेश यादव का अधिकार बताया। घटनाक्रमों के बीच समाजवादी पार्टी दो धड़ों में बंट गई।
चुनाव आयोग ने अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष मानते हुए उन्हें समाजवादी पार्टी का सिम्बल साइकिल प्रदान कर दिया है। समाजवादी पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता दोनो धड़ो में एकता लाने के लिए निरन्तर प्रयासरत है लेकिन मेल-मिलाप के असर कम ही है।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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