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योग और यज्ञ भारतीय संस्कृति के दो आयाम है

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 28 नवम्बर, योग और यज्ञ भारतीय संस्कृति के दो ऐसे आयाम हैं जो मनुष्य को अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि के लिए निरन्तर प्रेरणा देते रहते हैं जिसमें योग से शारीरिक एवं आत्मिक उन्नति होती है तो यज्ञ से इसके अलावा सामाजिक और सांसारिक उन्नति भी होती है। इसलिए प्रत्येक भारतीय को अपनी संस्कृति से जुघ्कर यज्ञ और योग को अपने जीवन में उतारना चाहिए। यह बातें स्वामी दयानन्द विद्यालय सुर्तीहट्टा बस्ती में आयोजित साप्ताहिक वैदिक यज्ञ के अवसर पर बच्चों को यज्ञ की प्रेरणा देते हुए यज्ञाचार्य आदित्य नारायण गिरि ने कही। उन्होने बच्चों को परीक्षा के समय ओंकार और गायत्री मंत्र जप के लाभ के बारे में बताते हुए कुछ समय के लिए ध्यान लगाने की सलाह दी। बताया कि गायत्री मंत्र के अर्थ का चिन्तन करते हुए ध्यान करने से बुद्धि कुशाग्र होती है जिससे कठिन विषय भी स्वाभाविक रूप से याद हो जाते हैं।
ध्यान करने से बच्चों के मन में जो परीक्षा के समय विशेष तनाव रहता है जिसके कारण कई बच्चे डिप्रेशन के शिकार भी हो जाते हैं उससे भी निजात मिलती है। उन्होने अभिभावकों को सलाह देते हुए कहा कि अपने बच्चों को परीक्षा में अधिक अंक लाने के लिए विशेष दबाव न दें बल्कि परीक्षा की तैयारी के समय उनका उत्साहवर्द्धन करें व सहयोग करें तथा परीक्षा में आने वाली कठिनाठयों के विषय में भी बात करें जिससे बच्चे स्वस्थ मन से परीक्षा की तैयारी कर सकें।
इस अवसर पर बच्चों ने यज्ञ द्वारा पारिवारिक तथा पर्यावरण सुरक्षा के उपाय भी सीखे। इस अवसर पर अनूप कुमार त्रिपाठी, दिनेश कुमार मौर्य, रमेश मिश्र, पुष्पेन्द्र राजपूत, अरविन्द श्रीवास्तव, कंचन निषाद, बीना वर्मा, माधुरी, ज्योति, अम्बिका प्रसाद उपाध्याय, गरुणध्वज पाण्डेय आदि सम्मिलित रहे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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