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योगी के मुख्यमंत्री बनने पर मथुरा में निरन्तर जश्न मनाया जा रहा है

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
मथुरा 21 मार्च, उत्तर प्रदेश में भाजपा के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के शपथ ग्रहण के बाद भाजपा कार्यक्रताओ में खास जोश देखने को मिल रहा है जिसकी खुसी में होली मिलन समारोह और कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया जिसमे कवियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की सरकार कैसी होगी और कैसे काम करेगी अपनी कविता के माध्यम से बताया । साथ ही साथ सपा , कांग्रेस और बसपा का क्या हुआ उस पर भी कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किये।
कवियों की नजर में योगी की ताज पोसी कवि डॉ रमा शंकर पांडेय ने अपनी कविता में कहा अब तक सीने में उड़ती थी घुमड़ती थी अब उन्हें सुर साज देने यहाँ आ गया, रगड़े गए थे अब तक जो कुसाशन से उन दीन दुखियों का ताज यहाँ आ गया सब के विकास की पवित्र भावना हो जहाँ ऐसी सद भावना का राज यहाँ आ गया।
भोगियों से अब यूपी मुक्त करने आए योगी राज ,योगी राज यहाँ आ गया माया और वही अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कवि ने कहा शेर को जो गधा समझने की जो भूल हुई यह भूल आपसे भारी हुई जी वैसे ही साइकिल पंचर पड़ी थी यहाँ ऊपर से बैठ गयी हाथ की सवारी जी, आपके ही कुनबे ने आप का ही कबाड़ा किया और कसके निचोड़ दी सत्ता की खुमारी जी। .काम यहां बोला नहीं कारनामा बोल गया इसलिए लुटिया तुम्हारी डूब गई जी ।
वही मायावती पर भी कवियों ने क्या कहा आपका ना यहां नाव चलाना हाथी का पांव चला आपकी ना बात बनी आपकी ना नादानी में जाति मजहब वाला खेल फेल हुआ आपकी गली ना दाल अति बुद्धिमानी में जनता तो चाहती विकास का प्रकाश लिए आपना उत्तर पाएं वक्त की रवानी में जनता को पढ़ा नहीं पड़ने यूं ही पलटती रही इसलिए हाथी डूबा चुल्लू भर पानी में मोदी और अमित को भी किया होली की मस्ती में शामिल वहीं दूसरी कवि आभा द्विवेदी ने कहा मोदी जी खेले अमित शाह जी खेले श्रीकांत शर्मा जी के भाग जगी योगी आदित्य जी के झंडा लहरा स्वाति जी की लाज बची तभी चढ़ गई अब भंग की मस्ती सबको मुबारक हो यह मथुरा की होली सबको शुभ मुबारक हो यह यूपी की होली कवि मोहनलाल गौतम ने भी अपने अंदाज में कुछ इस तरह कविता पढ़ी जादू बड़ा कमाल अमित मोदी के साथ का छोटा पड़ा मुकुट साइज में सबके माथे का केशव की मुरली चोरी हुई आलमबाग में बाज गया डमरू लखनऊ में आदित्यनाथ का जोड़ी है।
हाथ हुई दूषित और साईकिल हुई खटारा बेईमानी राहुल-अखिलेश की और सप्लाई जैसे जर्जर फेस की, हाथ तो हो गया दूषित ये घपले-घोटालों में, साइकिल हो गई खटारा अब ना रह गई रेस की वही अन्य कवियों ने भी अपनी कविताओं से श्रोताओ को झूमने पर मजबूर कर दिया । कवियों की गुदगुदाने वाली और व्यंग भरी कविताओ को सुनने के लिए श्रोता देर रात तक जमे रहे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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