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युवा शक्ति देश की रीढ़ होती है-शैलेन्द्र शास्त्री

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 2 दिसम्बर, जो अपने अन्दर स्थित प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान आदि वायु को योग प्राणायाम आदि से संतुलित रखते हुए त्रिदोषों वात, पित्त, कफ आदि को नियन्त्रित रखता है उसे ही युवा कहते है। उक्त बातें बोलते हुए आचार्य शैलेन्द्र शास्त्री ने कही। बताया कि युवा शक्ति देश की रीढ़ होती है, युवाओं को सकारात्मक उर्जा देने के लिए प्राचीन वेदों, दर्शनों व शास्त्रों का सहारा लिया जाना चाहिए। उनके भीतर उत्तम कौशलों के विकास करने के लिए व उन्हें दुर्गुणों और दुव्र्यसनों से बचाने में परिवार, समाज व सरकार को पूरा सहयोग करना चाहिए। इससे पूर्व वैदिक यज्ञ में ओंकार आर्य, प्रमोद श्रीवास्तव, सरोज त्रिपाठी मुख्य यजमान रहे। इस अवसर पर ओम प्रकाश आर्य प्रधान आर्य समाज नई बाजार बस्ती ने बताया कि अबकी बार प्रयागराज के कुम्भ मेले में आर्य समाज व आर्य वीर दल द्वारा वेद प्रवचन, भेजन, आवास व वैदिक साहित्य का वितरण किया जायेगा जिसका दायित्व मधुप नारायण शुक्ल एडवोकेट, व प्रमोद आर्य को सौंपा गया है। इस कार्यक्रम में दिनेश आर्य प्रशिक्षक आर्य वीर दल दिल्ली प्रदेश ने प्रेरक गीत प्रस्तुत कर युवाओं को कुमार्ग से हटकर सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
शिक्षक अरविन्द श्रीवास्तव ने जिस दिन वेदों के मंत्रों से धरती को सजाया जायेगा। उस दिन मेरे गीतों का त्यौहार मनाया जायेगा गीत प्रस्तुत कर वेदमार्ग पर चलने का आह्वान किया। समस्तीपुर बिहार से पधारे ज्ञानेन्द्र आचार्य ने गांव-गांव में वेद ज्ञान व गुरुकुल के प्रचार व स्थापना पर जोर दिया। पं0 राममगन व अलका शास्त्री ने अपने भजनोपदेश के माध्यम से युवाओं को आसन, प्राणायाम, ब्रह्मचर्य का पालन व स्वाध्याय को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। पं0 महावीर मुमुक्षु ने अपने उद्बोधन में बताया कि संसार में दो मार्ग हैं एक श्रेय मार्ग व दूसरा प्रेय मार्ग। श्रेय मार्ग पहले तो दुःख देता है पर बाद में आनन्द प्रदान करता है पर प्रेय मार्ग पहले आकर्षक व सुख देने वाला होता है पर बाद में उससे प्राप्त दुःखों को कोई अंत नहीं होता।
कहा कि विचार एक विज्ञान है इसी से सभी ज्ञानेन्द्रियाॅ विकसित होती हैं। केवल किसी को प्रत्यक्ष दुःख पहुॅचाना ही हिंसा नहीं है बल्कि किसी की अज्ञानता का फायदा उठाकर उसे ठगना भी हिंसा है जो आज समाज में प्रत्यक्ष दिख रहा है। एक पत्थर का संस्कार होकर जब मूर्ति बनती है तो उसकी कीमत बढ़ जाती है ठीक उसी प्रकार संस्कार होने हमारा महत्व बढ़ जाता है। घर में यज्ञ के संस्कार रहने से उससे निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा पूरे परिवार को सकारात्मक भावना से भर देती है जिससे संस्कारवान संतति का निर्माण होता है और आपसी मतभेद मिटते हैं इसलिए हमें अपना जीवन यज्ञीय बनाना चाहिए। कहा कि ईश्वर उपासना से मिथ्या ज्ञान समाप्त होता है जिससे सर्वत्र निर्भयता प्राप्त होती है।
जिस प्रकार नदी का लक्ष्य सागर है उसी प्रकार इस जीवात्मा लक्ष्य परमात्मा है इसलिए आत्मा को लक्ष्य तक पहुॅचाने के लिए संसार का त्यागपूर्वक करना चाहिए। वह हमें हर बुरे कार्य के समय भय, शंका, लज्जा आदि के द्वारा रोकता है और हर अच्छे कार्य में उत्साह, प्रसन्नता आरोग्यता आदि से युक्त कर पूरा सहयोग करता है। उसके इस सहारे को हमें समझना चाहिए। संचालक देवव्रत आर्य ने बताया कि आर्य समाज सदैव से लोगों अंधविश्वास और ढोंग पाखण्ड से दूर करता आ रहा है समाज में शुचिता व भाईचारा का विकास करना इसका मुख्य उद्देश्य है।
इस अवसर पर विश्वनाथ प्रसाद शर्मा मण्डल प्रभारी, भारत स्वाभिमान समिति बस्ती, मुन्ना लाल गुप्ता, राजेन्द्र जायसवाल, दिलीप कसौधन, आदित्य आर्य, रजनी आर्य,रामराज त्रिपाठी, ओंकार आर्य, आनन्द स्वरूप आर्य, रजनी आर्य, कंचनलता आर्य, अर्चना आर्य,भागवत बरनवाल, अशोक आर्य, ओम प्रकाश आर्य, उदयभान आर्य, उमा आर्य शिवांग पाण्डेय, पुष्पा, उपेन्द्र आर्य, योगेश शुक्ल,प्रिंस बरनवाल, विकास बरनवाल, चुनमुनलाल, वशिष्ठ गोयल, उपेन्द्र शर्मा,अजीत कुमार पाण्डेय सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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