आज की ताजा खबर

मातृ सम्मेलन मे बेटी का महत्व बताया गया

(विचारपरक प्रतिनिधि द्धारा)
बस्ती 7 दिसम्बर, बेटी बचाओ बेटी पढाओ के मूल मंत्र को लेकर स्वामी दयानंद विद्यालय सुर्तीहट्टा बस्ती में मातृ सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें माताओं को सम्बोधित करते हुए नवनिर्वाचित नगर पालिका परिषद बस्ती की अध्यक्षा श्रीमती रूपम मिश्रा ने कहा कि भारतीय संस्कृति ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ के मूल मंत्र में जीने वाली सर्वोत्तम संस्कृति है। इसका सबसे बडा उदाहरण है कि हम माताओं के सम्मान में गाय, गंगा एवं गायत्री मंत्र तथा अपने देश भारत को भी माॅ ही कहकर ही पुकारते हैं। बच्चों की प्रथम पाठशाला माता ही होती है जब मा को संस्कारवान बनाती है तो यह माना जाता है कि हमारे देश का वर्तमान और भविष्य सुरक्षित हो रहा है। इससे पूर्व कार्यक्रम का प्रारम्भ बच्चों द्वारा प्रस्तुत ईश्वर स्तुति प्रार्थनोपासना से हुआ। रोशनी खान, आयुषी कसेरा, शिखा गुप्ता एवं शिवानी ने स्वागत गीत के द्वारा अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर बच्चों ने प्रेरक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर माताओं को भाव विभोर कर दिया। बीजेपी के सक्रिय कार्यकर्ता पुष्कर मिश्र ने कहा कि मातृ सम्मेलन के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए माताओं द्वारा सहयोग प्राप्त होने पर ही विद्यालय का प्रयास सार्थक हो सकता है।
उन्होने माताओं से अपने गुण कर्म व स्वभाव से बच्चों को एक सफल नागरिक बनाने में सहयोग करने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर संचालिका बीना वर्मा ने बच्चों के विकास में माताओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्हें बच्चों की संस्कारयुक्त शिक्षा के लिए प्रेरित किया। कहा कि पुत्र कुपुत्र भले ही हो जाय पर माता कुमाता नहीं होती।
आचार्य आदित्य नारायण गिरि ने बच्चों के विकास सम्बन्धी प्रश्नोत्तरी के द्वारा जहाॅ एक ओर माताओं को बच्चों के प्रति कत्र्तव्य बोध कराया वहीं सटीक उत्तर देने वाली माताओं को पुरस्कृत किया गया। अपने बच्चों के प्रति विशेष जागरूकता रखने वाली फातिमा बेगम एवं फूलमती को मातृ श्रेष्ठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर माताओं के खुशी के आॅसू छलक गये और उन्होने भावपूर्ण भावनाएॅ भी व्यक्त की। खान पान से सम्बन्धित एक प्रश्न का उत्तर देते हुए माता ने उत्तर दिया कि हम जैसा अन्न खाते हैं वैसा हमारा मन बनता है इसलिए हमारा दायित्व है कि हम बच्चों का खान पान ऐसा रखें जो स्वाद के साथ साथ स्वास्थ्य के लिए हो जिससे हमारे बच्चों को हर जगह उत्तम संस्कारयुक्त वातावरण मिले। इसके अलावा बेटी की शिक्षा व उसके विकास के लिए भी माताओं ने सटीक उत्तर देकर अन्यों के लिए प्रेरणा देने का कार्य किया। आचार्य गिरि ने माताओं को बच्चों के मित्रों व उसके सामाजिक क्रिया कलापों पर भी ध्यान देने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर प्रबन्धक ओम प्रकाश आर्य ने कहा कि माता पिता व गुरु में माता का स्थान श्रेष्ठ है क्योंकि माता निर्माता होती है वह अपने बच्चे को जैसा चाहे वैसा बना सकती है। विशिष्ट अतिथि शशिकला श्रीवास्तवा प्रधानाचार्य आर्य कन्या इण्टर कालेज ने कहा कि ईश्वर हर जगह नहीं पहुॅच सकता इसलिए उन्होने माॅ की रचना की है और हमें बहुत बडा उत्तरदायित्व सौंपा हैं। हमें संकल्प लेकर इसे पूरा करना चाहिए। शिक्षक अनूप कुमार त्रिपाठी व दिनेश मौर्य ने बताया कि सन्तान माॅ और गुरु के गुण से विद्वान, पिता के गुण से चरित्रवान व अपने गुणों से धनवान होता है। शिक्षिका माधुरी व ज्योति गुप्ता ने माता पर गीत प्रस्तुत किया और बच्चों के अध्ययनशील बनाने के लिए माताओं के सहयोग की अपेक्षा की। अंत में प्रधानाध्यापक गरुण ध्वज पाण्डेय द्वारा कृतज्ञता ज्ञापन व शान्तिपाठ से कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य रूप से अरविन्द श्रीवास्तव, पुष्पेन्द्र राजपूत, कंचन निषाद, रमेश चन्द्र मिश्र, अम्बिका प्रसाद उपाध्याय, अम्बिका प्रसाद तिवारी,नीलम गुप्ता, गीता देवी एवं रामरती देवी आदि ने विशेष सहयोग किया।

About The Author

अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enter the text from the image below