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मां पल्टा देवी के आशीर्वाद से पाण्डवों को राज्य मिला था

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
सिद्धार्थनगर 23 मार्च, आदि काल में घनघोर जंगलो से अच्छादित मां पल्टादेवी का मंदिर महाभारत काल से जुडा हुआ है। बताया जाता है कि पांडवो द्वारा अज्ञात वनवास काल में इस मंदिर में पहुंचकर पूजा अर्चना की गई और इसके बाद ही उनके भाग्य पलट गये इसी कारण इस मंदिर में स्थित मां का नाम पल्टा देवी रख दिया गया।
तहसील शोहरतगढ़ से सात किमी उत्तर नेपाल सीमा के पास स्थापित मां पल्टा देवी मंदिर बिगडो का भाग्य पलटकर उनके दुःखो को हर लेती है। चैत्र नवरात्र के दिनो में इस मंदिर पर श्रद्धालुओं का रेला लगा रहता है। इस मंदिर के बारे में किम्बदंतियो के अनुसार महा भारत काल में अज्ञात वनवास के दौरान पांडव यहां आये और रात्रि विश्राम भी किये थे। इस मंदिर के समीप एक तालाब भी है। किम्बदंतियो के अनुसार पांडवो ने इस तालाब में स्नान भी किया और मां की पूजा अर्चना की। बताया जाता है कि पांडवो के यहां मां के दर्शन पूजा अर्चन करने के बाद उनका भाग्य उदय हो गया। तभी से मां पल्टा देवी मंदिर का नाम जाना जाता है जो वर्तमान में नौ शक्तिपीठो में एक शक्तिपीठ माना जाता है।
जो वर्तमान परिवेश में हजारो देवी भक्तों के श्रद्धा का केन्द्र बली हुई है। वैसे तो यहां प्रत्येक दिन सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु मां का पूजा अर्चन करते है किन्तु नवरात्र के समय नेपाल सीमा के सटे होने के कारण लाखो की संख्या में विभिन्न जनपदों से लेकर मित्र राष्ट्र नेपाल श्रद्धालु मंदिर में पहुंचकर मां की पूजा अर्चना करते हुए अपनी मन्नते मांगते है। बताया जाता है कि जो भी भक्त पूरे मनोयोग से प्रत्येक मंगलवार को मां की पूजा अर्चना करता है मां उसके भाग्य को पलट देती है।
पल्टादेवी शक्तिपीठ के महंत धनश्याम गिरि ने बताया कि इस मंदिर पर राज्यपाल से लेकर राष्ट्रपति तक मत्था जीत सुनिश्चित करने के लिए मां के दरबार में मत्था टेकने जरूर पहुंचते है और वादे करते है मंदिर की बेहतरी के लिए किन्तु जीतने के बाद उनके वादे सब्जबारा की तरह होकर रह जाते है। इस ऐतिहासिक पल्टा देवी मंदिर में भगवान शिव के प्राचीन मंदिर के साथ अन्य देवी देवताओं के भी मंदिर बने हुए है जो नवरात्र के शुरू होने के समय से लेकर यहां एक महीने तक मेला भी लगता है। जिसमें विभिन्न जनपदों के झूला, नौटंकी, व सर्कस आदि पहुंचकर मेला के आकर्षण के केन्द्र बने रहते है।
बासंतिक नवरात्र में भक्त अपनी मन्नतो को लेकर प्रत्येक दिन हजारों की संख्या में भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। दर्जनो भक्त मंदिर के आस-पास निवास कर दुर्गा चालिसा दुर्गा पाठ करते हुए मां की पूजा अर्चना में लिप्त रहते है। मंदिर के आस-पास दर्जनो दुकाने लगी हुई है। जिसमे मां के पूजन के लिए चुनरी नारियल फूल अगरबत्ती आदि पूजन सामग्री की बिक्री कर अपना जीविकोपार्जन में लगे हुए है। शारदीय एवं बासंतिक नवरात्र में मां. पल्टा देवी के दरबार में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
मंदिर की बेहतरी के लिए कमेटी भी गठित की गयी है जिसमे मंदिर सम्बन्धी समस्याओ के निस्तारण के लिए महंत की व्यवस्था है।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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