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महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने हेतु जागरूक किया गया

(विचार परक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 22 मार्च, महिलाओं को माहवारी के दौरान अपनाये जाने वाले अस्वच्छता के चलते कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है । खासकर दलित और पिछड़े तबके की महिलाओं द्वारा माहवारी के दौरान गंदे कपडे का उपयोग व सही प्रबंधन की जानकारी ना होना उनके स्वास्थ्य के लिए बड़ी बाधा है। यह बातें केंद्रीय रोजगार गारंटी काउंसिल (सीईजीसी) भारत सरकार की सदस्य सुश्री पुष्पा पाल ने युवा विकास समिति जनपद बस्ती द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से प्रेस क्लब बस्ती में दलित और पिछड़े महिलाओं में माहवारी स्वच्छता एवं प्रबंधन को बढ़ावा देने पर आयोजित सेमिनार व कार्यशाला का स्वच्छ माहवारी प्रबंधन कही । कहा कि माहवारी महिलाओं के अधिकार व सम्मान का विषय है। उपस्थित महिलाओं में जागरूकता के उद्देश्य से सिनेटरी पैड का निःशुल्क वितरण भी किया गया।
प्रशिक्षक रिचा ने कहा कि बालिकाओं में नौ से 13 वर्ष की आयु के मध्य पीरियडस आने शुरू हो जाते हैं। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ वी. के. वर्मा ने कहा की माहवारी के दौरान पैड के इस्तेमाल के समय हाथ को साबुन से धुलने के साथ प्रयोग में लाए गए पैड का निस्तारण बहुत जरुरी है । उन्होंने कहा की इस्तेमाल पैड को कागज में लपेट कर जमीन में गाड़ देना चाहिए । गंदगी से पर्यावरण प्रदूषण के साथ ही खान-पान की वस्तुएं दूषित हो जाती हैं।
डॉ नवीन सिंह ने कहा कि गांवों में माहवारी के दौरान महिलाओं को अपवित्र कहा जाता है लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है। अगर स्वच्छता है तो सब ठीक है। सभी को साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। आकाशवाणी की उद्घोषिका शुभ्रा सिंह ने बताया कि किशोरियों में मासिक धर्म होने की वजह से खून की कमी होना स्वाभाविक है। अगर माहवारी ठीक ढंग से न हो तो प्रजनन अंगों को संक्रमण, दर्द, दाने व खुजली आदि संभावना हो सकती है जो कि घातक हो सकता है। संध्या ने बताया कि खून की कमी से निपटने के लिए आयरन की गोली नियमित रूप से किशोरियों का सेवन किया जाना अनिवार्य है। दुर्गावती ने बताया कि माहवारी का मुद्दा, जो महिलाओं व किशोरियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है पर माहवारी के विषय में बात नहीं की जाती। इसे शर्म का विषय समझा जाता है। नतीजतन उचित जानकारी के अभाव में किशोरियों व महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों व परेशानियों से जूझना पड़ता है। डॉ सिम्मी भाटिया कभी-कभी किशोरी बालिकाएं उन दिनों की परेशानियों की वजह से उचित व्यवस्था व मार्गदर्शन के अभाव में स्कूल जाना छोड़ देती है,जो कतई सही नहीं है।
पत्रकार राजेंद्र नाथ तिवारी ने कहा की देश में आज भी कई ऐसी कुरितिया और समस्यायें है जिस पर हर तबका कुछ भी बोलने से कतराता है। इन्हीं में से एक है माहवारी स्वच्छता जिसे लोग महिलाओं से जुड़ा मुद्दा होने के कारण शर्म का विषय मानते रहे है। जब की माहवारी एक ऐसा बिषय है, जो महिला के स्वास्थ्य होने और उसके मा बनने के काबिल होने की एक निशानी है। माहवारी को शर्म का बिषय मानने के चलते इस पर लोग खुल कर बोल नही पाते हैं। मेडिकल कालेज अम्बेडकर नगर के परामर्शदाता प्रवीण गुप्ता ने कहा कि लोग महिलाओं के माहवारी स्वच्छता के प्रति थोड़ा सजग भी है, वह आज भी दुकानों से माहवारी के दौरान इस्तेमाल होनें वाले सेनेटरी पैड खरीदने में संकोच करते है और खरीदे गयें सेनेटारी पैड को काली पन्नी या कागज में ही लपेट कर ले जाते है। पंकज त्रिपाठी, डॉ राम भजन गुप्ता ने कहा की औरत के लिए शर्म से बढ़कर कोई बीमारी ही नहीं है, इस शर्म को दूर करने की भरसक कोशिश की जाने की जरुरत है ।
जिला स्काउट मास्टर कुलदीप सिंह ने माहवारी के दौरान किये जाने वाले योगासन की विधि बताई कार्यशाला में महिलाओं को माहवारी के दौरान सावधानियों व बचाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यशाला में नीलम मिश्रा, धर्मेन्द्र पाण्डेय , सचिन्द्र शुक्ल, विशाल पाण्डेय अनूप मिश्र, नीलम मिश्रा, विद्या देवी दुर्गावती,शान्ति देवी, बदामा देवी, सुनीता यादव,साधना,मंजू देवी, रामसूरत, राधेश्याम चैधरी बृहस्पति कुमार पाण्डेय आदि ने योगदान दिया।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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