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महाधम्म सम्मेलन का आयोजन हुआ

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
सिद्धार्थनगर 17 दिसम्बर, दि बौद्धिस्ट सोसाइटी आफ इंडिया जनपद इकाई द्वारा जिला कारागार के मैदान में आयोजित महाधम्म सम्मेलन संपन्न हुआ। सम्मेलन को मुख्य अतिथि बातौर संबोधित करते हुए दि बौद्धिस्ट सोसाइटी आफ इंडिया के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष भीमराव यशवंत राव अंबेडकर ने उपस्थित लोगांे को संबोधित करते हुए कहा कि बौद्ध धर्म दुनिया का पहला ऐसा धर्म है जो विज्ञान एवं आनिसवरबाद पर आधारित है। इसमें समता, स्वतंत्रता, और बधुत्व का समावेश है। आज यह धर्म दुनिया के 36 देशांे मंे फैला हुआ है। वर्तमान समय में दुनिया में जो अशांति, हिंसा, अत्याचार, अंधराष्ट्रवाद आतंकवाद, का संकट के बादल मडरा रहे हैें और दुनिया मंे नफरत का माहौल कायम होता जा रहा है। इन सभी का निदान बौद्ध धर्म के दर्शन व मान्यताआंे के रास्ते से ही तलाशा जा सकता है।
उन्होने कहा कि 14 अक्टूबर 1956 मंे बाबा साहब ने नागपुर में पांच लाख से ज्यादे लोगांे के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था, और इस सूखे हुए गुलिस्ते को फिर से गुलजार बनाया। आज भारत भूमि पर यह धर्म बढने के बजाय विलुप्तीकरण के कगार पर जा पंहुचा है और भारत में यह संक्रमण काल के दौर से गुजर रहा है। बुद्ध के विचारों ने घालमेल कर के उसके मूल अवधारणा को नष्ट करने का कार्य किया जा रहा है।
जिसमें दलित समाज के लोग भी शामिल हैंे। दलित समाज के नेतृत्व जो सत्ता के लालच मंे बुद्ध के मूल सिंद्धान्थ बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय को सर्वजन हिताय को सर्वजन सुखाय मंे तब्दील कर उसे बैदिक कर्मकांडों एवं बा्रहमणीकरण करने का कार्य किया जा रहा है। ऐसे लोगों से सावधान होकर बुद्ध की मूल विधारधारा को बचाये रखना आज की सबसे बडी चुनौती है।
संबोधन करने वालों में जगदीश गवई राष्ट्रीय महासचिव, एडवोकेट राम आसरे बौद्ध एम्पी बौद्ध आदि लोगांे ने की। इस अवसर पर सैकडांे लोगांे की उपस्थित रही।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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