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मनुष्य को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहना चाहिए-करूणाशंकर

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 9 मार्च, मनुष्य को सदैव अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहना चाहिए, जो प्राप्त है वही पर्याप्त है, यह न मानकर पुरूषार्थ न करक¢ अर्थ क¢ लिए ही पुरूष जीता रहा तो घोर तृष्णा में फंस जायेगा। ऐसे में पूर्ण आत्म संतुष्टि, समय तथा सेवा का सदपयोग करने क¢ लिए कर्म करना चाहिए। उक्त बाते कथावाचक आचार्य करूणाशंकर मिश्र ने कही।
श्री मिश्र हर्रैया विकास खण्ड़ क¢ दौलतपुर गांव में चल रहे नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा क¢ तीसरे दिन श्रद्धालुओं को कथा का रसापान करा रहे थे। उन्होंनें कहा कि भागवत अपूर्वता, देवदुर्लभता, अमृत से भी श्रेष्ठ है। धुन्धकारी जैसे पापी को भी प्रेतत्व से मुक्ति प्रदान करने वाली श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन से मुक्ति दिला सकती है। कथा को विस्तार देते हुए उन्होंनें कहा कि संयम और जागरूकता क¢ आभाव में बेचैनी और घोर असंतुष्टि से भरा हुआ जीवन ही प्रेतत्व है।
उन्होने कहा कि अपने मन को प्रभु क¢ चरणो में समर्पित कर देने पर निश्चित ही परमगति की प्राप्ति होती है। इस मौक¢ पर पृथ्वीनाथ पाण्ड¢य, देवी प्रसाद पाण्ड¢य, जगदम्बा पाण्ड¢य, अनिल कुमार पाण्डेय, राज कुमार पाण्डेय, अनिरूद्ध पाण्डेय, ब्रम्हादीन पाण्डेय, शिवपूजन पाण्डेय, दयाराम प्रजापति, कामता यादव, झीने विश्वकर्मा, राम चरन यादव, रामबली, जयराम, गणेश कुमार पाण्डेय, दिनेश पाण्डेय, बिनय पाण्डेय, जज साहब, गोलू, कन्हैया सहित तमाम श्रद्धालु मौजूद रहे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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