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मधवापुर टोला को बुनियादी सुविधाएं दिलायी जाए

मनोज शुक्ल
विचारपरक संवाददाता
बढ़नी (सिद्धार्थनगर) 17 अप्रैल, तुलसियापुर एक तरफ सरकारें ग्रामसभाओं,टोलों व मजरों को विकसित करने में करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। वहीं बढ़नी ब्लाक का एक ऐसा मजरा है जो विकास की राह से कोसों दूर है।अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार यह टोला वर्षों से विकास की बाट जोह रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बढ़नी ब्लाक के बसावन पाकर उर्फ मदरहिया का मधवापुर टोला पर शायद जिम्मेदारों की इनायत भरी नजरें नहीं पड़ रही हैं तभी इस टोले में सड़क,पानी,बिजली,शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का पूर्णतया अभाव है।बसावन पाकर उर्फ मदरहिया का यह टोला तुलसियापुर चैराहे से एक किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित है।
इस टोले में आवागमन के लिए केवल चकरोड है।जिसपर हल्की बारिश होने के बाद पैदल चलना भी जोखिम भरा होता है।लगभग सात सौ की आबादी वाला यह टोला एक अदद प्राथमिक विद्यालय के लिए तरस रहा है।इस टोले के नौनिहाल शिक्षा के लिए या तो दूसरे गांवों के प्राथमिक विद्यालयों की तरफ रुख करें या तुलसियापुर के बिना मान्यता के स्कूलों में जायें।शुद्ध पेयजल के नाम पर टोले में लगे इण्डिया मार्का हैण्डपम्पों में केवल एक उपयोग में है।कुछ में लोगों ने मजबूरी में प्राइवेट नलों को लगा लिया है।बिजली अभी तक नहीं थी लेकिन केन्द्र सरकार की योजना के मुताबिक यह टोला भी राजीव गाँधी विद्युतीकरण योजना के तहत नवीन विद्युतीकरण में चयनित है।लेकिन अभी तक केवल बिजली के खम्भे ही गिरे हैं और विद्युत आपूर्ति नहीं हुई है।मधवापुर टोले में बना पंचायत भवन देखरेख के अभाव में बेकार साबित हो रहा है।पंचायत भवन के चारों ओर घास जमे हैं।इसीप्रकार टोले में बने आंगनबाड़ी केन्द्र लोगों के भूसा व उपलों के रखने के काम आ रहा है।
इस संदर्भ में बसावन पाकर उर्फ मदरहिया के रहने वाले मो.सफीक का कहना है कि कई बार टोले में सड़क के लिए सांसद,विधायक से लेकर अधिकारियों तक गुहार लगाया गया परन्तु नतीजा सिफर ही रहा।
इस संदर्भ में मधवापुर टोले के हरीराम पाण्डेय का कहना है कि सड़क,पानी,बिजली व स्कूल के लिए हम ग्रामवासियों ने सबसे निवेदन किया परन्तु कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
इस बारे में मधवापुर टोले के रहने वाले रामसंवारे का कहना है कि सरकार ने सबको शिक्षित करने के लिए हर टोले और मजरों में प्राथमिक विद्यालयों का निर्माण करवाया है परन्तु सात सौ की आबादी होने के बाद भी मधवापुर में विद्यालय न होना टोले का दुर्भाग्य ही है।
मधवापुर टोलावासी हफीजुल्लाह का कहना है कि यह टोला आजादी के लगभग अड़सठ साल के बाद भी अभी तक बुनियादी सुविधाओं का बाट जोह रहा है।कोई भी जिम्मेदार चुनाव के वक्त को छोड़कर शायद ही कभी टोले में आकर टोले की समस्याओं को जानने का प्रयास किया हो।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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