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मखौड़ा धाम से शुरू अयोध्या के 84 कोसी परिक्रमा में सामिल श्रद्धालु हनुमान बाग चकोही पहुचे

अनुराग कुमार श्रीवास्तव
विचारपरक संवाददाता
बस्ती 13 अप्रैल, जिले के मखौडा धाम से विश्व प्रसिद्ध अयोध्या का 84 कोसी परिक्रमा 12 अप्रैल बुधवार को शुरू हुआ था देर शाम परिक्रमा में सामिल साधु संत और भक्त जन अपने प्रथम पडाव छावनी के राम रेखा नदी के तट पर बने श्रीराम जानकी मंदिर परिसर से पूजा अर्चना के बाद आज अपने दूसरे पडाव हनुमान बाग चकोही पहुच गये है।
आज यहां यह जानकारी देते हुए छावनी आश्रम के महन्थ बाबा दयाशंकर ने बताया है कि परिक्रमा में सामिल साधु संत और भक्त जन आज पौराणिक राम रेखा नदी में स्नान और पूजा-अर्चना के बाद भगवान श्रीराम , श्री शंकर का जय घोष करते हुए धर्म ध्वज लहराते परिक्रमा के दूसरे पडाव दुबौलिया थाने के हनुमान बाग के लिए प्रस्थान किए, हनुमान बाग चकोही पहुचने पर ग्राम पंचायत प्रधान समाज सेवक श्री निवास पाठक द्वारा परिक्रमा मे सम्मलित लोागो का फूल माला पहनाकर भब्य स्वागत किया गया, इस वर्ष परिक्रमा में साधु’संतो और भक्त जनो की भारी भीड़ है बिगत वर्षो इस परिक्रमा एक हजार से दो हजार लोग सम्मलित रहते थे इस बर्ष यह संख्या तीन हजार से भी अधिक है। परिक्रमा में साधु संतो के साथ बडी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं सम्मलित है। परिक्रमा में सामिल सभी लोगो को छावनी आश्रम की ओर से विदाई दी गई, इस परिक्रमा में देश विदेश के हजारों साधूसंत और भक्तजन हिस्सा लें रहे है परिक्रमा में नागा जयराम दास शंकरदास संतोष दास राम कृपाल दास, भगौती दास, रामदास, सहित अनेक साधु-सुत भाग ले रहे है। 84 कोसी परिक्रमा सम्मलित साधू-सन्त तथा भक्त जन आज रात हनुमान बाग चकोही में विश्राम करेंगे और 14 अप्रैल शुक्रवार को स्नान ध्यान पूजा-अर्चना के बाद सरजु नदी के सेरवा घाट से होकर अम्बेडकर नगर जिले मेे प्रवेश करेंगे।
84 कोसी परिक्रमा का नेतृत्व कर रहे अयोध्या के हुए महन्थ गयादास ने बताया है कि प्रत्येक वर्ष निकलने वाली 84 कोसी परिक्रमा बस्ती जिले के मखौडा धाम से शुरू होकर अम्बेडकर नगर, फैजाबाद , बाराबंकी और गोण्डा जिले के भगवान श्री राम से जुडे स्थलों से होते हुए 5 मई 2017 शुक्रवार को वापस मखौडा आकर समाप्त होगी,उन्होने परिक्रमा की महत्ता के सम्बन्ध मे बताया है कि अशेध्या धाम की इस परिक्रमा को करने से मनुष्य को 84 लाख योनियो के जन्म से मुक्त मिल जाती है परिक्रमा का यह परिक्रिया सनातन काल से चली आ रही है त्रेता युग के रामावतार में भगवान श्री राम जिन रास्ते से चलकर ऋषियो-मुनियों की सहायता किए और राक्षसो का संघार किए उन्ही रास्तो से होकर यह यात्रा गुजरती है मोक्षदायिनी इस परिक्रमा से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते है धार्मिक मान्यता के अनुसार 84 कोसी परिक्रमा करने के बाद मनुष्य को 84 लाख योनियों से भटकने से मुक्ति मिल जाती है।
ज्ञातव्य हो कि अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए मखौड़ा में मनोरमा नदी के पवित्र तट पर श्रृंगीऋषि के देख-रेख में पुत्रेष्ठ यज्ञ करवाया था, इस यज्ञ के पूरा होने के बाद उन्हें चार पुत्रों की भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुधन की प्राप्ति हुई थी। तभी से मखौड़ा धाम में प्रत्येक वर्ष मेला लगता है और चैरासी कोसी परिक्रमा का शुभारम्भ और समापन दोनों की मखौड़ा धाम में होता है।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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