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भारत भारी का गौरवशाली इतिहास है

भारतभारी का गौरवशाली इतिहास है

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा )
डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर) 4 नवम्बर, भारत भारी का प्रसिद्ध मेला इस समय चल रहा है। इस मेले में बड़ी संख्या में लोग आते है और सरोवर में स्नान दान करके मंदिर में पूजा अर्चना करते है।
मेले में देश प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से नागरिक, दुकानें लेकर आते है और मेला देखने के लिए भी दूर-दूर से लोग आते है। भारत भारी का गौरव शाली इतिहास है। भारत भारी में समय-समय पर खुदाई के दौरान कई पुरातात्विक वस्तुओं का प्राप्ति भी हुई है। बताते है कि लक्ष्मण को शक्ति बाण लगने के बाद संजीवनी बूटी लेकर जा रहे हनुमान जी को शत्रु समझकर भरत ने बाण से मारा था बाण लगने के बाद हनुमान जी संजीवनी बूटी का पर्वत लेकर इसी स्थान पर गिरे थे।
उनके गिरने के बाद यहां पर एक विशाल सरोवर बन गया । जब भरत को यह मालूम हुआ कि हनुमान रूद्रावतार हैं तो उन्होने प्रायश्चित स्वरूप यहां शिवमंदिर का निर्माण करवाकर एक विशाल जलाशय बनवाया। जो आगे चलकर भारतभारी नाम से प्रसिद्ध हुआ । इसी गांव के बारे में यह भी बताया जाता है कि महराजा दशरथ पुत्र भरत ने इसी स्थान को अपनी राजधानी बनायी थी जो अचिरावती नाम से जानी जाती थी। इसकी पुष्टिगांव के ग्रामीणो द्वारा की गयी। खुइाई के दौरान मिले गंधर्व कला के कुछ अवशेष से भी यह बात स्पष्ट हो जाती है। करीब 4 साल पहले बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय के पुरातत्व विभाग द्वारा भी इस गांव का जायजा लिया गया था।
खुदाई से प्राप्त धातुओं की मूर्तियों के अवलोकन के बाद से इसे बौद्ध कालीन बताया गया। अवशेष व प्राचीन ईटो की मोटी-मोटी दीवारे कपिलवस्तु के शाक्त वंशीय काल से मिलती जुलती है। बताया जाता है कि 3 हजार साल पहले यह गांव बौद्ध धर्म से प्रभावित गांव था। गौतम बुद्ध ने यहां विश्राम की स्थिति में कुछ दिन व्यतीत किये थे। ग्रामीणो को खुदाई के दौरान कई मूर्तिया बर्तन और सिक्के समय-समय पर मिलते रहे है। यह धार्मिक व पुरातात्विक स्थान जो दर्जनो एकड़ में टीलों के रूप में फैला है। शासन व प्रशासन के उपेक्षा के चलते अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। भारतभारी को लेकर एक अन्य किवदंतियों के अनुसार महाभारत काल में पाण्डव जब अज्ञात वास के समय आद्रवन में दिन व्यतीत कर रहे थे तो उनसे मिलने के लिए भगवान श्रीकृष्ण इसी गावं के रास्ते से गये थे। और बगल में स्थित प्राचीन सरोवर में स्नान कर शिव मंदिर में पूजा अर्चना किये थे, इसका उल्लेख गोरखपुर के गजेटियर में भी मिलता है।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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