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भारत-नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में बाढ़ का खतरा

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर) 7 जुलाई, नेपाल से निकली पहाड़ी नदियों की तेज धारा को देखकर भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में नदी के किनारे बसे ग्रामीणों को अभी से भय सताने लगी है। बरसात के बीच नेपाल से निकली बानगंगा नदी की तेज धारा ने अभी से ही रह-रह कर अपनी विकराल रुप का नमूना पेश करना शुरु कर दिया है। नदी में बाढ़ का पानी बढ़ने से धनौरा मुस्तहकम गांव के पास बंधे का कटान अचानक देख कर क्षेत्र के कई गांव के लोग सहम गए। सुबह होते-होते सिंचाई विभाग ने सूचना पाते ही भारी संख्या में मजदूरों के साथ पहुंच कर बांध मरम्मत कार्य में जुट गए और बानगंगा बैराज के कई फाटक आनन-फानन में खोलकर पानी की निकासी कराई गई। हालांकि नदी में बाघ् का पानी न होने के चलते बांध मरम्मत में लोग जुटकर तेजी से कार्य तो कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों को भय है कि अभी तो पूरा बरसात का दिन बाकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात से पूर्व अगर शासन-प्रशासन व सिंचाई विभाग के द्वारा नदियों के बांध व कटान स्थलों का उचित मरम्मत कार्य कराया गया होता तो जनता बंधे की कटान के भय से मुक्त रहती।ग्राम प्रधान नसीम अहमद ने कहा की पिछले बार आयी बाघ् से 36 घण्टे से कोई गांव के बाहर निकल नही पाया था। बानगंगा नदी के बैराज के निकट व कोमरवा,रामगघ्वा आदि स्थानों पर भी कटान की संभावना बनी हुई है। अवर अभियंता एमटी राय का कहना है कि मामला उतना गंभीर नहीं है। जल्द ही कटान स्थल का मरम्मत कार्य पूर्ण करा दिया जाएगा।

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