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भारतीय जनजीवन में सेवा का विशेष महत्व है

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
संतकबीरनगर 21 फरवरी, सेवा ही भारतीय संस्कृति का मूल आधार है जो पुरातन काल से प्रभावशाली रही है। सेवा को ही आधार बनाकर समान एवं राष्ट्र रक्षा में जुटना होगा। देश की एकता एवं अखण्डता को बनाने के लिए सेवा के मूल मन्त्र से जुड़ना होगा।
उक्त उद्वगार जी0पी0एस0 स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रबन्धक डा0 उदय प्रताप चतुर्वेदी ने कही। डा0 चतुर्वेदी जी0पी0एस0 स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं शुभी देवी महिला महाविद्यालय के संयुक्त प्रशिक्षण शिविर उ0प्र0 भारत स्काउट एवं गाइड द्वारा पाॅच दिवसीय बी0एड0 प्रशिक्षुओ के स्पेशल इण्टोडक्ट्री कोर्स के उद्वघाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहेथे। उन्होने कहा कि आज देश को सहयोग एवं समर्पण का भाव रखने वाले देशभक्त की अत्यन्त आवश्यकता है। सेवा के माध्यम से भारत को विश्व गुरू के पटल पर स्थापित करना होगा जिससे भारत विश्व का मार्ग दर्शन करे। आज समाज में जातिवाद, धर्मवाद छुआछूत फैली हुई है जो देश के विकास मे ंबाधक है।
इसका समूल नाश करना होगा। विशिष्ट अतिथि डा0 चिन्तामणि उपाध्याय ने कहा कि यह प्रशिक्षण मनुष्य के अहंकार का विनाश करती है तथा यह मनुष्य के अन्दर समभाव का सृजन करती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डा0 चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा राष्ट्र के पुन निर्माण में युवाओ की सहभागिता वर्तमान समय की माॅग है। शिविर अध्यक्ष गिरिजेश पाण्डेय ने कहा यह प्रशिक्षण एक सच्च एवं अच्छा नागरिक बनान का सशक्त माध्यम ह। जिला स्काउट कमिश्नर रमेश चन्द्र यादव ने स्काउट एवं गाइड के भूमिका को बताया। संचालन डा0 बी0एन0 वर्मा ने किया। इस दौरान बी0टी0सी प्राचार्य अरविन्द पाल, एच खान, इरशाद आलम, प्रमोद यादव, भीम प्रसाद, सुमन चैबे, अर्चना पाण्डेय सहित तमाम लोग रहे।

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