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भारतभारी मेला 21 से ,हनुमान जी संजीवनी बूटी का पर्वत लेकर इसी स्थान पर गिरे थे

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(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर) 19 नवम्बर, महाभारत काल मे पाण्डव जब अज्ञात वास के समय आद्रवन मे दिन व्यतीत कर रहे थे तो उनसे मिलने के लिए भगवान श्रीकृष्ण इसी गांव के रास्ते से गये थे। और बगल मे स्थित प्राचीन सरोवर मे स्नान कर शिव मंदिर मे पूजा अर्चना किये थे। इसका उल्लेख गोरखपुर गजेटियर मे भी मिलता है।Bharat-Bhari1-520x245
जन श्रुतियो के अनुसार लक्ष्मण को शक्ति बाण लगने के बाद संजीवनी बूटी लेकर जा रहे हनुमान जी को शत्रु समझ कर भरत ने बाण से मारा था। बाण लगने के बाद हनुमान जी संजीवनी बूटी का पर्वत लेकर इसी स्थान पर गिरे थे। जिनके गिरने के बाद यहा पर एक विशाल सरोवर बन गया। बताया जाता है कि जब भरत को यह मालूम हुआ यह तो रूद्रवतार है तो उन्होने प्रायश्ति स्वरूप यहां शिवमंदिर का निर्माण कराकर भारत भारी नाम से एक विशाल नगर बसाया था।
इसी गांव के बारे मे यह भी बताया जाता है कि महाराजा दुष्यंत के पुत्र भरत ने इसी स्थान को अपनी राजधानी बनायी थी। जो अचिरावती के नाम से जानी जाती थी। इसकी पुष्टि गंाव के ग्रामीणो द्वारा की गयी। खुदाई के दौरान मिले गंधर्व कला के कुछ अवशेष से भी यह बात स्पष्ट हो जाती है।
हाल ही मे बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय के पुरातत्व विभाग द्वारा भी इस गंाव का जायजा लिया गया था। खुदाई से प्राप्त मूर्तियो व धातुओ के अवलोकन के बाद बौद्ध कालीन बताया गया। खुदाई मे मिले अवशेष व प्राचीन ईटो की मोटी माटी दीवारे  कपिलवस्तु के शाक्य वंशीय काल से मिलती जुलती है बताया जाता है कि 3 हजार साल पहले यहा गांव बौद्ध धर्म से प्रभावित गांव था।
गौतम बुद्ध ने यहा विश्राम की स्थिति मे कुछ दिन व्यतीत किये थे। ग्रामीणो को खुदाई के दौरान कई मूर्तिया बर्तन और सिक्के समय समय पर मिलते रहे है। जो इस स्थान की प्राचीन महत्व को प्रभावित करते है। यह धार्मिक व पुरातात्विक स्थाल जो एकड मे टीलो के रूप में फैला है। शासन व प्रशासन ने उपेक्षा के चलते अपना स्थान खोता जा रहा है।पुलिस की कड़ी व्यवस्था रहेगी।आज यहंा यह जानकारी देते हुए बताया गया है कि मेलें में निगरानी रखने के लिए सीसी टीवी कैमरा भी लगेगा।

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