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भारतभारी अनेक कारणो से महान तीर्थ स्थल है

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आलोक कुमार श्रीवास्तव
विचारपरक संवाददाता
सिद्धार्थनगर 19 नवम्बरए जिले के डुमरियागंज तहसली मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर डुमरियागंज रूधौली मार्ग पर भारतभारी गांव स्थित है। इस गांव का कई कारणो से पुरातात्विक व धार्मिक महत्व है।
आज यहा यह जानकारी देते हुए नागरिको ने बताया है कि  महाभारत काल मे पाण्डव जब अज्ञात वास के समय आद्रवन मे दिन व्यतीत कर रहे थे तो उनसे मिलने के लिए भगवान श्रीकृष्ण इसी गांव के रास्ते से गये थे। और बगल मे स्थित प्राचीन सरोवर मे स्नान कर शिव मंदिर मे पूजा अर्चना किये थे। इसका उल्लेख गोरखपुर गजेटियर मे भी मिलता है।
मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम के वन चले जाने के बाद उनके भाई भरत भारतभारी मे रहकर राजकाज का संचालन करते थे।
लक्ष्मण को शक्ति बाण लगने के बाद संजीवनी बूटी लेकर जा रहे हनुमान जी को शत्रु समझ कर भरत ने बाण से मारा था। बाण लगने के बाद हनुमान जी संजीवनी बूटी का पर्वत लेकर इसी स्थान पर गिरे थे। जिनके गिरने के बाद यहा पर एक विशाल सरोवर बन गया। जब भरत को यह मालूम हुआ यह तो रूद्रवतार है तो उन्होने श्री हनुमान जी से क्षमा याचना किया और शीघ्र संजीवनी बूटी लेकर पहुचने का निवेदन किया था।
इसी गांव के बारे मे यह भी बताया जाता है कि महाराजा दुष्यंत के पुत्र भरत ने इसी स्थान को अपनी राजधानी बनायी थी। जो अचिरावती के नाम से जानी जाती थी। इसकी पुष्टि गाव के ग्रामीणो द्वारा की गयी। खुदाई के दौरान मिले गंधर्व कला के कुछ अवशेष से भी इस बात को बल मिलता है।
कुछ दिनो पूर्व बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय के पुरातत्व विभाग द्वारा भी इस गंव का जायजा लिया गया था। खुदाई से प्राप्त मूर्तियो व धातुओ के अवलोकन के बाद बौद्ध कालीन बताया गया। खुदाई मे मिले अवशेष व प्राचीन ईटो की मोटी माटी दीवारे  कपिलवस्तु के शाक्य वंशीय काल से मिलती जुलती है बताया जाता है कि 3 हजार साल पहले यहा गांव बौद्ध धर्म से प्रभावित गांव था।
गौतम बुद्ध ने यहा विश्राम की स्थिति मे कुछ दिन व्यतीत किये थे। ग्रामीणो को खुदाई के दौरान कई मूर्तिया बर्तन और सिक्के समय समय पर मिलते रहे है। जो इस स्थान की प्राचीन महत्व को प्रभावित करते है। यह धार्मिक व पुरातात्विक स्थाल जो कई एकड मे टीलो के रूप में फैला है।
लोकसभा क्षेत्र डुमरियागंज के संसद सदस्य जगदम्बिका पाल ने भारतभारी गांव को आदर्श संसद गांव के रूप में चयनित किया गया है। विकास की कई योजनाये तैयार की गयी है।
उन्होने विचारपरक से बातचीत मे बताया है कि भारतभारी को विकसित करने के लिए उनके द्वारा हर सम्भव प्रयास किया जायेगा।
भारतभारी में प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन से मेला लगता है। पहले यह मेला महीने भर चलता था अब यह मेला पखवारे भर में सिमट जाता है। मेले के संचालन हेतु जिलाधिकारी द्वारा उपजिलाधिकारी डुमरियागंज की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। इस समिति में उपजिलाधिकारी डुमरियागंज विनय कुमार सिंह अध्यक्षएपुलिसक्षेत्राधिकारीए जिला पयर्टन अधिकारीए तहसीलदारए खण्ड विकास अधिकारी एंव खाद्य सुरक्षा अधिकारी को समिति में रखा गया है।
सरकारी सूत्रो ने यह भी बताया है कि इस वर्ष भारतभारी मेले का शुभारम्भ 21 नवम्बर को डा0 सुरेन्द्र कुमार जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर द्वारा किया जायेगा।
इस समबन्ध में भारत भारी पर्यटन विकास समितिके सदस्य व अधिवक्ता रमेश कुमार पाण्डेय का कहना है कि शासन प्रशासन की उपेक्षा के चलते इस ऐतिहासिक स्थान को पर्यटन स्थल के रूप मे नही विकसित किया जा सका है। जहां पर विद्यामान कई पुरातात्विक अवशोषो को ग्रामीणो द्वारा नष्ट किया जा रहा है।
उन्होने कहा कि इस वर्ष जिलाधिकारी द्वारा बैठक किया गया साथ ही भारतभारी से रोडवेज की बस चलाने की निर्देश दिया गया। उनका कहना था कि जिस स्थान पर हर साल लाखो की संख्या मे लोग आते रहते है वहां पर यह संख्या धीरेण्धीरे कम होती जा रही है। उन्होने यह भी बताया कि वर्ष 1875 मे यहां के मेले में 50 हजार दर्शनार्थी आये थे। जिसका वर्णन यूनाइटेड पाविसेंज आफ अवधि एंड आगरा के वाल्यूम 32 के पेज 196.97 मे अंकित है।
श्री पाण्डेय ने शासन प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराये जाने की भी मांग की है।

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