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भगावत कथा सुनने से जीवन सुखमय हो जाता है

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
संतकबीरनगर 3 दिसम्बर, संगीतमयी श्रीमद भागवत कथा खलीलाबाद सदर विधायक दिग्विजय नारायण जय चैबे के ग्राम भिटहा पोस्ट-विश्वनाथपुर आवास परिसर में 9 दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का शुभारम्भ शनिवार की देर शाम शुरू हुआ। वृन्दावन से पधारे कथा व्यास पंण्डित अजय शास्त्री के मुखार बिन्दु से श्रीमद भागवत कथा प्रवचन भजन, कीर्तन के साथ प्रारम्भ हुआ कथा का शुभारम्भ कथा के आयोजन पंडित सूर्य नारायण चतुर्वेदी की धर्मपत्नी ने व्यास गद्दी पर पुष्प अर्पण दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कथा व्यास पंडित अजय शास्त्री ने श्रीमद भागवत कथा के प्रथम दिन श्रोताओ को बताया कि एक बार भगवान विष्णु एवं देवताओं के परम पुण्यमय क्षेत्र नैमिषारण्य में शौनकादि ऋषियों ने भगवत्प्राप्ति की इच्छा से सहस्र वर्षो में पूरे होने वाले एक महान यज्ञ का अनुष्ठान किया। एक दिन उन लोगो ने प्रातः काल अग्निहोत्र आदि नित्यकृत्यों से निवृत्त होकर सूतजी का पूजन किया और उन्हे ऊॅचे आसन पर बैठाकर बड़े आदर से यह प्रश्न किया।
ऋषियो ने कहा-सूतजी आप निष्पाप है। आपने समस्त इतिहास, पुराण और धर्म शास्त्रो का विधिपूर्वक अध्ययन किया है तथा उनकी भलीभाॅति व्याख्या भी की है। वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ भगवान बादरायण ने एवं भगवान के सगुण-निर्गुण रूप को जानने वाले दूसरे मुनियों ने जो कुछ जाना है उन्हे जिन विषयों का ज्ञान है, वह सब आप वास्तविक रूप में जानते है।
आपका हृदय बड़ा ही सरल और शुद्व है, इसी से आप उनकी कृपा और अनुग्रह के पात्र हुए है। गुरूजन अपने प्रेमी शिष्य को गुप्त से गुप्त बात भी बता दिया करते है। आयुष्मान। आप कृपा करके यह बतलाइयें कि उन सब शास्त्रों, पुराणो और गुरूजनों के उपदेशों में कलियुगी जीवों के परमकल्याण का सहस साधन आपने क्या निश्चय किया है। महामुनि व्यासदेव के द्वारा निर्मित इस कथा व्यास पं0 अजय शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्वागवत महापुराण में मोक्ष पर्यन्त फल की कामना से रहित परम धर्म का निरूपण हुआ है। इसमें शुद्वान्त करण सत्पुरूषों के जानने योग्य उस वास्तविक वस्तु परमात्मा का निरूपण हुआ है, जो तीनों तापों का जड़ से नाश करने वाली और परम कल्याण देने वाली है। अब और किसी साधन या शास्त्र से क्या प्रयोजन। जिसे समय भी सुकृति पुरूष इसके श्रवण की इच्छा करते है, ईश्वर उसी समय अविलम्ब उनके हृदय में आकर बन्दी बन जाता है।
रस के मर्मज्ञ भक्तजन। उन्होने कहा कि यह श्रीमद्वागवत वेदरूप कल्प वृक्ष का पका हुआ फल है। श्रीशुकदेव रूप तोते के मुख का सम्बन्ध हो जाने से यह परमानन्दमयी सुधा से परिपूर्ण हो गया है। इस फल में छिलका, गुठली आदि त्याज्य अंश तनिक भी नही है। यह मुर्तिमान रस है। जब तक शरीर में चेतना रहे, तब तक इस दिव्य भगवद रस का निरन्तर बार-बार पान करते रहो। यह पृथ्वी पर ही सुलभ है। इस अवसर पर सूर्या इण्टरनेशनल एकेडमी के प्रबन्धक डा0 उदय प्रताप चतुर्वेदी, पूर्व ब्लाक प्रमुख नाथनगर राकेश चतुर्वेदी,सरगम चतुर्वेदी, अखण्ड प्रताप चतुर्वेदी, अवधेश सिंह, बलराम पाठक, बलराम यादव, जीपीएस के प्राचार्य डा0 सी0पी0 श्रीवास्तव, शुभी देवी के प्राचार्य चिन्तामणि, खलीलाबाद नगर पालिका परिषद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्याम सुन्दर वर्मा, व्यापारी नेता बनार्जी लाल अग्रहरि, अश्वनी चैरसिया सहित भारी संख्या में सभ्रान्त नागरिक एवं ग्रामीणो का श्रवण किया और तालियों के गड़गाहट से पूरा पण्डाल गूंज उठा।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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