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भगवान शिव को श्रावण माह में मनाएं

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 12 जुलाई, भगवान शिव का माह होता है श्रावण माह यह माह प्रकृति और देवो के देव महादेव को समर्पित है। हिन्दू पौराणिक कथाओ के अनुसार यह वही माह है जब समुन्द्रमंथन हुआ था। समुन्द्र मंथन में कई
दिव्य बस्तुएं निकली और निकला विष, जिसे भगवान शिव ने अपने कंठ में रखकर इस संपूर्ण सृष्टि को बचाया था।
जब शिव ने इस विष को अपने कंठ में धारण किया तो उनको कंठ नीला हो गया। इसीलिए शिव को नीलकेश्वर महादेव भई कहते है। नीलकेश्वर महादेव की पूजा यदि श्रावण माह में की जाए तो व्यक्ति को मनोवांक्षित
फल की प्राप्ति होती है।
मान्यता है कि श्रावण माह में शिवलिंग पर जल इसीलिए अर्पित करते है ताकि शिव के कंठ में मौजूद विष के प्रभाव को कम किया जा सके शिवपुराण में इस बात का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसीलिए
शिव भक्त श्रावण माह में शिवलिंग पर जल अर्पित कर अपनी मनोकामनाओ की पूर्ति का वरदान मांगते है।
वैसे तो श्रावण माह शिव का माह है लेकिन इस माह में प्रकृति भी मेहरबान रहती है। श्रावण माह में प्रकृति की हरियाली की चादर ओढ़ चुकी होती है। इस माह में श्रावण माह के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की
आराधना करना शुभ माना जाता है।
जिसमें श्रावण माह के प्रथम सोमवार को कच्चे चावल से, दूसरे सोमवार को तिल से, तीसरे सोमवार को खड़े मूंग से, चैथे सोमवार को जौ से पांच वे सोमवार को सत्तु अर्पित करना चाहिए
ऐसा करने पर भगवान शिव की कृपा शिवभक्त पर जरूर बरसती है।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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