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भगवान परशुराम का सही मूल्यांकन नहीं हुआ- राजेन्द्र नाथ तिवारी

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 5 दिसम्बर, भगवान परशुराम का मूल्यांकन जातिवाद नेताओं के कारण ठीक नहीं किया गया। जो सम्मान परशुराम को होना था वह वस्तुतः हुआ नही। और उनके व्यक्तित्व के साथ कुछ अराजक तत्वों व जातिवादी, प्रवृत्तियों न अपनी रोटी ब्राह्मण महासभा आदि बनाकर किया। वास्तव में भगवान परशुराम विष्णु के 18 वें व राम 19 अवतार रहे। शायद, दुनिया में यह वेमिशाल संयोग मिलेगा कि सनातन धर्म में परशुराम से राम के अस्मिता (सत्ता) का हस्तान्तरण किया। और परशुराम कि सामाजिक योगदान यह था कि अन्याय, अत्याचार, अनाचार, कदाचार के विरूद्ध खडा होकर उसका त्वरित मुकाबला परशुराम की प्रतिदेन है।
उक्त उद्गार वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र नाथ तिवारी ने श्री भगवान परशुराम मन्दिर अवस्थापना ध्वजारोहण समाराहे में व्यक्त किए। उन्होंने कहा मूल्यों, मान्यताओं, परम्पराओं का संरक्षण और संस्कृति की रक्षा व गुरू-शिष्य पंरपरा का अद्भुत समन्वय परशुराम जी मे था।
कार्यक्रम में मानसहंस श्री जगदम्बा दूबे ने लक्ष्मण परशुराम संवाद की विशद व्याख्या की, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ ने अवधेश सिंह, बलराम सिंह, अतुल सिंह, पूर्व सूचना निदेशक डाॅ0 दशरथ प्रसाद यादव, पेशकार मिश्रा, राधेश्याम शुक्ल एडवोकेट, प्रधान श्री कक्कू शुक्ल सहित अनेक लोगों की सारगर्मित उपस्थित रही अन्त मंे श्री परशुराम मंदिर निर्माण हेतु संकल्प पड़कर कार्यक्रम सम्पन्न, कार्यक्रम के आयोजक सीता शरण पति ने सबके प्रति आभार व्यक्त किया।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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