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बेकल उत्साही के निधन से साहित्य जगत को भारी छति हुई

अनुराग कुमार श्रीवास्तव
विचारपरक संवाददाता
बस्ती 4 दिसम्बर, उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में जन्में उर्दू साहित्य जगत के मशहूर शायर और लेखक गांव गरीब से जुड़े बेकल उत्साही के निधन से साहित्य जगत को अपूर्णनीय छति हुई है। राज्यसभा के पूर्व सदस्य एंव मशहूर शायर मोहम्मद शफी खान बेकल उत्साही का शनिवार की सुबह दिल्ली में राम मनोहर लोहिया अस्पताल में निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। बेकल उत्साही के निधन पर देशभर के साहित्यकारों, पत्रकारों, राजनेताआंे द्वारा गहरी शोक संवेदना व्यक्त की गयी है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने मसहूर शायर बेकल उत्साही के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया हैं। मुख्यमंत्री नें अपने शोक संदेश में कहा कि बेकल उत्साही आला दर्जे के शायर और कवि थें। उन्होनें साहित्य को अपनी रचनाओं सें समृद्ध किया साहित्य जगत को समृद्ध बनाने का योगदान को देखते हुए प्रदेश सरकार नें उन्हें यशभारती सम्मान से सम्मानित किया था। श्री यादव नें उनकी आत्मा की शांति की कामना करते हुए उनके परिजनों को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना कि हैं। सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव नें अपनें शोक संदेश में कहा कि बेकल उत्साही नें अपनी शायरी द्वारा सदैव धर्मनिरपेक्षता का संदेश दिया और धार्मिक कट्टरवाद की फिलाफत की उनके निधन से जहां हिन्दी, उर्दू काव्य जगत की अपूर्णनीय क्षति हुई, वही धर्मनिरपेक्षता का एक योद्धा एंव स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चल गया हैं। उनके निधन पर प्रसिद्ध शायर मुनौवर राना ने दुःख व्यक्त करते हुए कहा है-बेकल साहब से हमारा करीबी ताल्लुक रहा वे मुझे हमेशा बेटे की तरह समझते थे और मेरे पिता तुल्य थे, उनके निधन से जो छति हुई है वह पूरा नहीं किया जा सकता। उनके जाने पर हम अफसोस कर सकते है, आंसू बहा सकते है। लेकिन उनके जैसा कोई दूसरा नहीं ला सकते।
मशहूर शायर मोहम्मद शफी खान बेकल उत्साही के निधन पर प्रेस क्लब बस्ती में शोक सभा का आयोजन प्रेस क्लब अध्यक्ष विनोद उपाध्याय की अध्यक्षता में शोक सभा का आयोजन किया गया। शोक सभा में वरिष्ठ पत्रकार अनिल कुमार श्रीवास्तव, दिनेश चन्द्र पाण्डेय, मजहर आजाद, लक्ष्मी नारायन पाण्डेय, प्रेस क्लब महामंत्री महेन्द्र त्रिपाठी, कार्यकारिणी सदस्य कांशी प्रसाद दूबे, अनवर अली अंसारी, चन्दन निषाद, राकेश कुमार निषाद, सोहन सिंह, मोहन सिंह, देवी प्रसाद श्रीवास्तव, अनुराग कुमार श्रीवास्तव सहित अन्य पत्रकारों ने मौन रह कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
मशहूर शायर बेकल उत्साही पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू व इंदिरा गांधी के काफी करीबी थे गांधी परिवार से इतना गहरा नाता था कि राजीव गांधी भी बेकल उत्साही को अपना अभिभावक मानते थे नेहरू जी ने ही सबसे पहले बेकल को उत्साही की उपाधि दी थी 1975 में साहित्य सेवा के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मनित किया गया था।
उनका जन्म एक जून 1928 बलरामपुर के उतरौला में जन्म वास्तविक नाम शफी खान था उत्साही उपनाम जवाहर लाल नेहरू ने दिया स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपने गीतों के कारण जेल भी गए कांग्रेस ने 1986 में राज्यसभा का मनोनीत सदस्य बनाया 1952 में विजय बिगुल कौमी गीत और 1953 में बेकल रसिया लिखी गोण्डा हलचल प्रेस, नगमा व तरन्नुम, निशात-ए-जिन्दगी नूरे यजदां, लहके बगिया महके गीत,पुरवईयां, कोमल मुखडे बेकल गीत, अपनी धरती चांद का दर्पण जैसी कई किताबों के लेखक पद्मश्री, हिन्दी संस्थान के सौहार्द सम्मान सहित कई सम्मानों , पुरस्कारों से सम्मानित किये गये थे।
वे जिन्दगीभर अपने गांव जवार और स्थानीय समस्याओं के प्रति जागरूक रहे। बाढ़ की दर्द को कुरेदते हुए उन्होंने लिखा था-नदियां पी गई गांव, बादल पी गये छप्पर छांव गीत सब डुब गये, उनकी इस रचना में बाढ़ पीढि़तों का दर्द को सामने रखता है। उन्होंने अपने विषय में लिखा था-सुना है मोमिन व गालिब न मीर जैसा था, हमारे गांव का शायर नजीर जैसा था, छिड़ेगी दैरो हरम में ये बहस मेरे बाद, कहेंगे लो कि बेकल कबीर जैसा था।
उन्हांेने राजनीति और उसकी व्यवस्था पर प्रहार करते हुए लिखा था-अगर सत्ता में बहुमत हो तो साझा तोड़ देती है, सियासत बाप-बेटे का रिश्ता तोड़ देती है।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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