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बभनी गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी

बभनी गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
शोहरतगढ़, (सिद्धार्थनगर) 23 मार्च, स्वच्छ भारत मिशन के तहत साफ-सफाई को लेकर प्रधानमंत्री मोदी जी अपने अधिनस्त विकास का दावा करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को कितना भी दिशा निर्देश दे दें, किन्तु कीचड़ युक्त सड़क और नाली नजर पड़ने के बाद सभी योजना धरी की धरी रह जाती है।
भले ही उत्तर प्रदेश में विकास को लेकर कई योजनाएँ सुचारू रूप से संचालित हैं, किन्तु शोहरतगढ़ विकास खण्ड के ग्राम पंचायत की बभनी की नाली और सड़क को देखने के बाद प्रदेश की विकास वाली योजना की पोल खुल जाती है।
कीचड़ युक्त गन्दगी के अम्बार से आये दिन भयंकर बिमारियों के फैलने की अशंका बनी रहती है, ऐसा लगता है कि यहां का जनजीवन पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है, और किसी को स्वास्थ्य से कुछ लेना देना नहीं।
जानकारों की माने तो उक्त ग्राम पंचायत कभी अन्य ग्राम पंचायतों का अंग हुआ करता था किन्तु ग्राम पंचायतों के सीमांकन के बाद जयपुर, बभनी और भदाव तीनों को मिलाकर एक ग्राम पंचायत बनाया गया जो कि अभिलेखों में बभनी के नाम से दर्ज है।
सूत्रों की माने तो उक्त गांव की ग्राम प्रधान सावित्री देवी निर्वाचित है और ग्राम के विकास का कार्य पप्पू चैधरी द्वारा किया जाता है, उक्त के सम्बन्ध मे जब प्रधान प्रतिनिधि पप्पू चैधरी से बात की गयी तो उन्होने कहा कि वे नाली बनवाने के लिए तैयार, किन्तु कुछ विवाद के कारण निर्माण नहीं कराया जा रहा है।
अब सवाल यह पैदा होता है कि अगर कहीं सामान्य विवाद है तो क्या उस गाँव का विकास नहीं होगा? फिर भी अगर किसी प्रकार का विवाद है तो क्या जनप्रतिनिधियों का दायित्व नहीं बनता की मामले का निस्तारण करवाकर विकास में तेजी लाई जाय।
खैर अब देखना यह है कि विकास करने से दूर भागने वाले अपनी जिम्मेदारी से कब तक पीछा छुड़ाते है और क्या इन समस्यओं का समाधान मात्र कागजों में ही रहकर 5 सालों का सफर यूं ही तय कर लेगा। यह तो भविष्य के गर्भ में समाहित है।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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