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प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बदहाली का शिकार

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर) 27 मार्च, जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर मौजूद स्टाफ ग्यारह बजे तक अस्पताल का ताला तक नहीं खोल रहे हैं और मरीजों को मजबूरन झोलाछाप चिकित्सकों के यहां जाकर इलाज करवाना पड़ रहा है और अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर होना पड़ रहा है।
बढ़नी ब्लाक के अहिरौला स्थित नया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल बंद मिला और इलाज के लिए आये मरीजों को मजबूरन वापस जाना पड़ा। इस मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि रोजाना प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर तैनात फार्मेसिस्ट इसी प्रकार ग्यारह बजे के बाद अस्पताल पर आते हैं और तीन बजे अस्पताल बंद करके चले जाते हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र अहिरौला पहले भुतहिया में एक प्राइवेट मकान में संचालित था। लगभग पांच वर्ष पूर्व तुलसियापुर चैराहे के निकट अहिरौला बाग में इसे स्थानान्तरित किया गया।
लोगों के मुताबिक अहिरौला, औदही कलां, तुलसियापुर, मानपुर, गड़रखा, मनिकौरा, चरिहवां, मटियार उर्फ भुतहवा, खैरहनिया, केवटलिया, जलापुरवा समेत दो दर्जन से अधिक गांवों के हजारों लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए जिम्मेदार यह अस्पताल शुरु से ही चिकित्सक विहीन है और कई बार क्षेत्रीय लोगों ने इसके लिए जनपद के आला अधिकारियों से चिकित्सक की तैनाती की मांग भी किया परन्तु अधिकारियों ने जनपद में चिकित्सकों की कमी का हवाला देकर चिकित्सकों की तैनाती नहीं किया।
हजारों लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल की जिम्मेदारी एक फार्मेसिस्ट के जिम्मे है परन्तु वह भी रोजाना ग्यारह बजे आकर अस्पताल का ताला खोलते हैं। जिससे सरकार के इस अस्पताल को बनवाने की मंशा पूरी होती दिखाई नहीं दे रही है और क्षेत्र के मरीजों को मजबूरन चैराहों पर अपनी क्लीनिक को खोले झोलाझाप डाक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है और उनके धन और जान दोनों खतरे में रहते हैं।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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