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प्रशासन की सूझ-बूझ से समस्या सुलझी

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 14 अप्रैल, डा. अम्बेडकर की 126 वीं जयंती पर जुलूस निकालकर कलवारी से बस्ती पहुचे अनुयायियों ने सुबाष तिराहे पर घण्टों बवाल काटा। कुछ ही देर में सुबाष तिराहा पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। एहतियात के तौर पर एलआईयू, नगर, कप्तानगंज, छावनी थाने की पुलिस फोर्स बुला ली गयी, सीओ सदर पहले वही मौजूद थे। बात नही बनी तो एडिशनल एसपी और एडीएम भी आॅन स्पाट हुये। काफी मान मनौव्वल हुआ, प्रदर्शनकारी किसी कीमत पर मानने को तैयार नही थे।
बाबा साहब के अनुयायी जुलूस को मालवीय रोड होते हुये कटेश्वर पार्क तक ले जाना चाहते थे। प्रशासन भी झुकने को तैयार नही था। इसके लिये बाकायदा पहले से अनुमति ली गयी थी। प्रशासन अनुमति पत्र दिखाकर हालात को काबू करने के प्रयास में लगा रहा। प्रदर्शनकारियों को भी प्रशासन का रूख भांपने में समय नही लगा। नतीजा यह हुआ कि उन्हे सुबाष तिराहे से ही वापस लौटना पड़ा। प्रशासन ने भी रांहत की संास ली।
भीमराव अम्बेडकर दलित उत्थान समिति की ओर से अम्बेडकर जयंती के अवसर पर कलवारी से जुलूस निकाला गया। बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरूषों ने जुलूस में हिस्सा लिया। बुद्ध विक्रम राव, वीपी सक्सेना, अनिल भारती तथा सीताराम भारती जुलूस का नेतृत्व कर रहे थे।
कलवारी, कुसौरा, फुटहिया होते हुये जुलूस सुबाष तिराहा पहुंचा, यहां जैसे ही जुलूस मालवीय रोड पर आगे बढ़ा, सुरक्षा बलों ने जुलूस को रोक लिया। अनुमति के कागज दिखाकर उन्हे मनाने की कोशिश की गयी, सीओ सदर ने भी काफी मशक्कत की।
वे मानने को कत्तई तैयार नही थे। प्रशासन को भी फैसला लेने में वक्त नही लगा। एडिशल एसपी और एडीएम मौके पर पहुंच गये, उधर प्रदर्शनकारी सड़क पर ही बैठ गये। अंततः प्रदर्शनकारियों को प्रशासन के आगे झुकना पड़ा, सुबाष तिराहे से ही उन्हे वापस कर दिया गया।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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