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पूर्वांचल का पिछड़ापन अब दूर होगा

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर) 22 मार्च, पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिलों में एक लम्बे अर्शे से पूर्वांचल राज्य गठन की मांग होती रही है। राज्य पुनरगठन आयोग तथा बीपी पटेल आयोग सहित जल कुण्डी योजना लागू करने की मांग लम्बे समय से हो रही है।
आज यहां यह जानकारी देते हुए समाज सेवक अशोक कुमार श्रीवास्तव, जिला पंचायत सदस्य मो0 जमाल ने कहा है कि यदि पूर्वी उत्तर प्रदेश के 27 जिलों को मिलाकर अलग राज्य गठित कर दिया जाय, तो इस क्षेत्र का पिछड़ापन दूर हो जायेगा। इस क्षेत्र में 117 विधान सभा क्षेत्र तथा 23 लोक सभा क्षेत्र आते है। यहां के लोग हिन्दी, भोजपुरी और अवधी बोलियां बोलते है। सन् 1991 में प्रदेश सरकार द्वारा पूर्वांचल विकास निधि की स्थापना किया गया था। इस क्षेत्र में शिक्षा, रोजगार के अवसरों की बेहद कमी है।
पूर्वांचल के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार हुआ है। वोट लेने के बाद राजनीतिक दल इस क्षेत्र को भूल जाते रहे है। इस क्षेत्र की प्रमुख समस्या है-बाढ़, सूखा, सिंचाई के साधनों की कमी से नागरिक विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पा रहे है।
दोनों समाज सेवकों ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बनने से नागरिकों में यह आशा जगी है कि इस क्षेत्र का पिछड़ापन दूर होगा और पूर्वांचल राज्य के गठन को बल मिलेगा।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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