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धर्म की परीक्षा विपत्ति में होती है

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 20 फरवरी, रामकथा मैदान लेदर काम्लेक्स निपनियां चैराहा के तीसरे दिन जौनपुर से आये बाबा बजरंगदास महाराज ने कहा कि धर्म के चार चरण होते है। सत्य, तप, दया और दान जहां ये चारो पूर्ण रूप से घटित होते है। वही ब्रम्ह का आगमन होता है। अयोध्या धर्म की नगरी थी इसलिए वहां भगवान का अवतार हुआ। महाराज ने श्रोताओं को एक सन्देश दिया कि मनुष्य को किसी भी स्थिति में धर्म निरपेक्ष नही होना चाहिए धर्म की वास्तविक परीक्षा विपत्ति के समय में ही होती है।
धीरज, धर्म मित्र अस नारी। आपदकाल परखि हमें चारी।।
सुल्तानपुर से आये बाल व्यास सम्पूर्णानन्द महाराज ने राम नाम के प्रभाव को बताते हुए कहा कि हनुमान जी महाराज राम नाम को जप करके सौ जोजन समुद्र पार कर लिया । आज भी मनुष्य भाव के साथ राम-राम को जपे तो भवसागर से पार हो सकता है।
आसु नाम सुमिरत एक बारा। उतरहिं नर भवसिंधु अपारा।।
झासी से आई कथावाचक अनीता भारती ने कथा सुनाकर श्रोताओं कामन मुग्ध किया
इस अवसर पर भजन गायक जितेन्द्र पाण्डेय, अकबरपुर, नाल वादक में परमानन्द बीकापुर एवं संगीत पाण्डेय सिद्धार्थनगर में भजन सुनाकर श्रोताओं को मुक्त किया। श्रोतागणः- अनिल कुमार मिश्रा, हरिश्चन्द्र पाण्डेय, रामयज्ञ मिश्र, विजय पाण्डेय, माधव शर्मा, विश्वनाथ गौड़, गायत्री पाण्डेय, रामेश्वर चैहान, रामप्रसाद चैहान, विनोद शर्मा, अनिल शर्मा, सत्यभामा, शिखा मिश्रा, पुष्पा देवी, सीमा मिश्रा, अनीता मिश्रा, मंजू देवी, सुशीला देवी, संगीता देवी, माया देवी आदि उपस्थित रहे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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