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दूसरे की मदद करने वाला अल्लाह के बेहद करीब होता है-न्यायाधीश कलीमुल्लाह खां

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(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 20 मार्च, उच्च न्यायालय इलाहाबाद के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कलीमुल्लाह खां ने कहा है कि अल्लाह ने ये दुनियां बेहद खूबसूरत बनाई है। इसमें हमारे आप जैसे चांद सितारे बनाये हैं। जाहिर है इतनी खूबसूरती बख्शने के बाद उन्होने सोचा होगा कि हमारे बनाये बंदे अपने अच्छे और नेक कार्यों से दुनियां की खूबसूरती को कायम रखेंगे।
उन्होंने यह विचार बतौर मुख्य अतिथि बल्ली पट्टी गांव में अल्हाज अब्दुल रज्जाक कन्या इण्टर कालेज में आयोजित आॅल इण्डिया मुशायरे के उद्घाटन मौके पर कहा कि दुनियां अल्लाह का कुनबा है। यहां जो बंदा दूसरों की मदद इमदाद करता है ईश्वर या अल्लाह के बेहद करीब होता है। उन्होने ‘अजीब दर्द का रिश्ता है इस दुनियां में, जहां भी जाइये अपना ही घर लगता है‘ ‘गुज़रे हैं कई लोग और भी इधर से, लेकिन तेरी खुशी न गई रहगुजर से‘ सुनाकर माहौल को शायराना बना दिया।
इस मौके पर उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग के निदेशक अनिल कुमार दमेले ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम के संयोजक समाजसेवी अकरम खां के मन में समाज सेवा का जजबा है, इन्हें समाज सेवा का बहाना मिलना चाहिये, फिर उनके लिये हैसियत या संसाधनों का कोई मतलब नही, उन्होने जरूरत के मुताबिक लोगों की मदद की।
नेपाल त्रासदी का जिक्र करते हुये उन्होने कहा कि नेपाल में पीडि़तों को इमदाद पहुचाने के लिये अकरम ने जी जान लगा दिया। कई ट्रक सहायता सामग्री नेपाल ले गये, इस नेक कार्य के लिये उन्हे भारतीय दूतावास में सम्मानित किया गया। उन्होने अकरम के सफलता की कामना की। जाने माने शायर नदीम ने सफल संचालन से सभी का मन मोह लिया। उन्होने ‘ये दुनिया नफरतों की आखिरी स्टेज पर है, इलाज इसका मोहब्बतों के सिवा कुछ भी नही‘ सुनाकर सभी को प्यार मोहब्बत का पैगाम दिया। वे शायरों से बार बार सियासी फजाओं से बाहर निकलने का इशारा करते रहे।
कहा आज के मुशायरे में सियासी बातें न होकर सिर्फ प्यार मोहब्बत की बातें होंगी।
शादाब आज़मी ने ‘मदीना मै भी देखूं, ऐ खु़़दा अज़मे सफ़र देदे, अगर दौलत नही दी है तो उड़ने को पर देदे‘ तेरे महबूब के सदपे जो मांगे सब अता हो जाये, दुवा में ऐ ख़ुदा शादाब की इतना असर देदे‘ अतहर सगी ने ‘ जुल्म से आंख मिलाते हुये बेखौफ जवां‘ मुरादाबाद से आये बहुत कम उम्र के शायर अरकम हसनपुरी ने ‘आज मै समझा हूं मुझसे किस कदर वो दूर है, गैर की मेहदी लगी है गैर का सिंदूर है‘ सुनाया तो पूरा पंडाल में शुभानअल्लाह! से गूंज उठा। लोग वाह! वाह! करने लगे।

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इसके बाद हास्य कवि रामकृष्ण लाल जगमग, फिरोजाबाद से आये कलीम नूरी, फजले हक खलीलाबादी, शाइस्ता सनां, असद मेहताब, शाहिद बस्तवी, नदीम फर्रूख, लता हया, जौहर कानपुरी, निकहत अमरोही, हाशिम फिरोजाबादी, डा. शंकरजी सिंह, अनुराग मिश्र गैर, डा. अतहर, अंशुप्रिया ने देर रात तक माहौल को खुशनुमा बनाये रखा। हास्य कवि विकास बौखल ने अपनी रचनाओं से सभी को लोटपोट कर दिया।
इस मौके पर निष्ठापूर्वक विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले विभूतियों को उनके सराहनीय कार्यो के लिए सम्मानित किया गया। इसमें प्रमुख है सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति कलीमुल्लाह खांन, उनकी पत्नी आलम आरा, प्रशासनिक सेवा से सीपी श्रीवास्तव, पंचायतीराज निदेशक एके दमेले, एआरटीओ कौशाम्बी शंकरजी सिंह, रंजना अग्रहरि, डा. सीमा चैधरी, डा. अलका शुक्ला, सिस्टर भगवती, सुमन गौतम, सुनीता यादव, स्नेहल यादव, शशि पाण्डेय, प्रेमलता त्रिपाठी, सैफ अली, अनराुग मिश्र, डा. इकबाल, डा.एमए खान, पुनीत ओझा, पुष्कर पाण्डेय, जीशान हैदर, जयत कुमार मिश्रा, तनवीर, रजनीश त्रिपाठी, विनोद उपाध्याय, सर्वेश यादव, मजीद खां, गुलाम नबी अहमद, कपिल मुनि सिंह, रवीन्द्र गौतम, बसंत लाल, पारसनाथ, अशोक सिंह, सुरेन्द प्रसाद, एके सिंह, वकील खां, इरफानुल्लाह खां, बजरंगबली पांडे, जगदीश शुक्ला, राम अधार पाल, रंगीलाल, अशोक मिश्रा, सुमित श्रीवास्तव, अंसार अली, डा. इम्तियाज, मास्टर अख्तर, एसके सिंह, अशोक श्रीवास्तव, राजकुमार पाण्डेय सहित शिक्षा, चिकित्सा, समाजसेवा, प्रशासनिक सेवा, अधिवक्ता से जुड़ी नामचीन हस्तियों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिये शाल, प्रशस्ति पत्र और मोमेण्टो देकर सम्मानित किया गया।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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