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दिमागी बुखार की रोकथाम हेतु मीडिया जन जागरूकता पैदा करे- दिनेश कुमार सिंह

दिमागी बुखार की रोकथाम हेतु मीडिया जन जागरूकता पैदा करे- दिनेश कुमार सिंह

अनुराग कुमार श्रीवास्तव
विचारपरक संवाददाता
बस्ती 30 मार्च, दिमागी बुखार की रोकथाम और प्रबन्धन के लिए विशेष संचारी रोग नियंत्रण हेतु अप्रैल माह में अभियान चलाकर टीकाकरण किये जाने की प्रदेश सरकार की योजना है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला मुख्यालय के होटल बाला जी प्रकाश में आज मंडलीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया।
आज यहां आयोजित इस कार्यक्रम का दीप प्रज्जवलन कर आयुक्त बस्ती मंडल दिनेश कुमार सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मीडिया कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए आयुक्त ने कहा कि दिमागी बुखार किन कारणो से फैलता है इसकी सटीक जानकारी लोगो को नही है। साफ-सफाई ,शुद्ध पेयजल के उपयोग से इस गम्भीर बिमारी को रोका जा सकता है।
उन्होने जोर देकर कहा कि प्रिन्ट मीडिया को इस बीमारी को रोकने हेतु सार्थक पहल करना होगा बीमारी के प्रति बचाव और जागरूकता पैदा करने में प्रिन्ट मीडिया की भूमिका बहुत सराहनीय हो सकती है। इलेक्ट्रानिक मीडिया भी जन जागरूकता कार्यक्रम में सहयोग प्रदान करें। श्री सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के लोग पूरी तैयारी करके टीका करण अभियान को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाये। और आम जनमानस में रोग के प्रति जागरूकता पैदा करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाये।
आयोजन को सम्बोधित करते हुए बस्ती जिले के मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पाण्डेय ने कहा कि साफ-सफाई , शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करके इस बीमारी से बचा जा सकता है। खुले पानी वाले नालियो , तालाबो, में एन्टी लारवा का छिड़काव किया जाय और निरन्तर जागरूकता बरता जाये तभी इस बिमारी से छुटकारा मिल सकता है।
इस मौके पर उपनिदेशक सूचना बस्ती मंडल डा0 एम0डी0 सिंह ने अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मंडल के मीडिया जगत से जुडे हुए पत्रकार इस अभियान को सफल बनाने में अपनी रचनात्मक भूमिका का निर्वहन करेंगे। मंडल के पत्रकार जागरूक है बिमारी के प्रति आम जनमानस में चेतना पैदा करने के लिए पत्रकारो की भूमिका का विशेष महत्व है। आयोजन को स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक, अपर निदेशक, ने भी सम्बोधित करते हुए अपना-अपना विचार व्यक्त किया।

दिमागी बुखार की रोकथाम हेतु मीडिया जन जागरूकता पैदा करे- दिनेश कुमार सिंह-

कार्यशाला को वरिष्ठ पत्रकार यू0एन0आई0 संवाददाता अनिल कुमार श्रीवास्तव ने सम्बोधित करते हुए कहा कि मीडिया और स्वास्थ्य विभाग के बीच और बेहतर ताल-मेल की जरूरत है मंडलीय कार्यशाला में पत्रकारो की उपस्थिति बहुत कम है यह व्यवस्था की कमी है सरकारी योजनाओं की जानकारी जब तक पत्रकार को नही होगी वह कैंसे की जरूरत है पत्रकार किसी योजना को जनजन तक कैसे पहुचायेगा जब उसे खुद ही योजनाओं की जानकारी नही रहेंगी। जनहित की बात आम आदमी तक पहुचाने के लिए यह आवश्यक है कि पत्रकारो तक समय से सूचना पहुच जाये।
इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी जे0एल0एम0 कुशवाहा ने अतिथियो का स्वागत करते हुए मीडिया और विभाग के बीच बेहतर सम्बन्ध बनाये जाने के सुझाव का स्वागत करते हुए कहा कि आपस में तालमेल बैठाकर विभागीय योजनाओं का प्रचार – प्रसार किया जायेगा।
इस मौके पर डा0 शालिनी ने इसेफ्लाइटिस के सम्बन्ध में अपना विचार विस्तार से व्यक्त करते हुए बताया कि स्क्रब टाइफस उत्तर प्रदेश के बस्ती और गोरखपुर मंडल के सात जिलो (गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, और बस्ती) में पाया गया है, स्क्रब टाइफस से इलाज के लिये एजिथ्रोमायिसिन और डाॅक्सीसिक्लिन नामक एंटीबायोटिक दवायें प्रयोग होनी चाहिए। यदि सही समय पर सही इलाज किया गया हो तो प्रभावित व्यक्ति पूरी तरह से ठीक हो सकता है। स्क्रब टाइफस के लिये कोई प्रभावी टीकाकरण नहीं है, यदि स्क्रब टाइफस का इलाज न किया जाये जो पहले सप्ताह के बाद 30-45 फीसदी मामलो में यह दिमागी बुखार, किडनी फेलियर, पीलिया (जाॅन्डिस) निमोनिया आदि जैसी जानलेवा बिमारियों की वजह बनसकता है। दिमागी बुखार हो जाने पर मरीज गंभीर मानसिक क्षति जैसे लकवा और मानसिक मंदता की चपेट में आ सकते है, जेई का वायरस मच्छरो के काटने से फैलता है।
कार्यशाला में बताया गया कि मच्छर खासकर ठहरे हुए पानी और धान के खेतो में पनप्ते है। और आसपास के आबदी वाले इलाको में बीमारी की वजह बनते है। यह संक्रमण व्यक्ति के संेट्रल नर्वस सिस्टम, मस्तिष्क और स्पाइनल काॅर्ड को प्रभावित करता है, एक से पंद्रह साल के बच्चों में जेई के फैलने का खतरा सबसे अधिक होता है। जो लोग धान की खेती या सूअर पालन वाले इलाको में निवास करते है उन पर जेई की चपेट में आने कस खतरा सबसे ज्यादा बना रहता है।, जेई सें प्रभावित लोगो में निम्न प्रकार के लक्षण 5 से 15 दिनों में दिखने लगते है- बुखार, कंपकपी, थकावट, सिरदर्द, मितली और उल्टी, आदि फ्लू जैसे लक्षण, शुरू में उलझन और चिड़चिडापन के लक्षण भी दिख सकते है, जब संक्रमण दिमाग तक पहंुच जाता है तों उसे दिमागी बुखार (एन्सीफेलाइटिस) कहा जाता है। इसकी वजह से मरीज लकवा या मानसिक अपंगता का शिकार भी हो सकता है, काफी बच्चों में गंभीर मानसिक क्षति, जैसे लकवा और मानसिक मंदता हो जाती है। और अनेक मामलो में जेई घातक सिद्ध हो सकता है, नियमित टीकाकरण के दौरान सभी बच्चों को जेई के दो टीके लगवाने जरूरी है। पहला टीका 9 महीने से 1 वर्ष की आयु और दुसरा टीका 16 माह से 2 वर्ष की आयु के भीतर लगवाना चाहिये, जेई विशेष टीकाकरण अभियान के दौरान 9 माह से लेकर 15 वर्ष के सभी व्यक्तियों को एक टीका लगाया जाता है ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सके, जेई के इलाज के लिए अभी तक खास एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। लेकिन लक्षण दिखते ही इसका तुरंत इलाज बहुत जरूरी है। लक्षण की तीव्रता के आधार पर कुछ मरीजो को अस्पताल में भर्ती कराना भी जरूरी हो सकता है।
कार्यशाला में बताया गया कि गोरखपुर और बस्ती मंडल के 104 प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रो पर मस्तिष्क रोग उपचार केन्द्रो, एन्सिफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर्स (ईटीसी) की स्थापना की गई है। यहां चैबीसो घंटे उपचार की निःशुल्क सेवाएं उपलब्ध है, सर्वाधिक प्रभावित सात जनपदो के जिला अस्पतालो में गंभीर रूप से बीमार बच्चों के चैबीस घंटे उपचार के लिए पीडीऐट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) स्थापित कर वेंटीलेटर के साथ प्रशिक्षित डाॅक्टर तैनात किये गये है, 108 और 102 एम्बुलेंस सेवा को ईटीसर तथा पीआईसीयू के साथ जोड़ा गया है ताकि मरीजो को समय से सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाया जा सके, 41,000 से अधिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओ को एईएस के कारणो, रोकथाम और उपचार पर प्रशिक्षित किया गया है।, दिमागी बुखार (नवकी बीमारी) की रोकथाम में समुदाय की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। इस विषय पर समुदाय को जागरूक करने के लिए पूर्व में कई गतिविधियां संचालित की गई है। इस वर्ष सबसे अधिक प्रभावित 7 जनपदों में घर-घर जाकर जागरूकता फैलाने के लिये दस्तक अभियान अप्रैल 2018 में आरंभ किया जा रहा है। इसके अन्र्तगत 2 से 16 अप्रैल तक संचारी रोग नियंत्रण पखवाड़ा मनाया जायेगा। इस पखवाडे में 1-15 वर्ष के छूटे हुए बच्चों को जेई का टीका भी लगाया जायेगा,
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि यह अभियान 3 चरणों में चलाया जायेगा- प्रथम चरण माह अप्रैल-मई, द्वितीय चरण माह जुलाई-अगस्त तथा तृतीय चरण माह अक्टूबर-नवंबर में, इस पखवाडे में विभिन्न सरकारी विभाग तथा गैर-सरकारी संगठन एक जुट होकर दिमागी बुखार की रोकथाम के लिये विभिन्न तरह के प्रयास करेंगे, दस्तक अभियान के अंतर्गत आशा बहने दिमागी बुखार से सबसे अधिक प्रभावित 7 जनपदो में घर-घर जाकर इसकी रोकथाम एवं उपचार के विषय में जागरूकता फैलायेंगी, दस्तक अभियान में जन प्रतिनिधियों, मीडिया तथा गैर सरकारी संगठनो का व्यापक सहयोग लिया जायेगा,इसके अलावा शिक्षको और स्कूली बच्चों द्वारा समुदाय में दिमागी बुखार की रोकथाम के लिये जागरूकता बढ़ायी जायेगी।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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