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जायरीनों का जत्था हल्लौर से रवाना हुआ

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(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर) 13 मार्च, पूरे विश्व को सत्य एंव अहिंसा की शिक्षा देने वाले मुसलमानों के चैथे खलीफा व मोहम्मद साहब के दामाद हजरत अली अलै0 व उनके बेटे हजरत इमाम हुसैन अस0 के रौजे की जियारत के लिए तहसील क्षेत्र के उपनगर हल्लौर से इराक स्थित विभिन्न धर्मिक स्थलों की जियारत के लिए जायरीनों का जत्था मंगलवार को रवाना हुआ। इस काफिले में कुल 16 जायरीन शामिल है।
रवानगी से पहले उपनगर हल्लौर स्थित शाह आलमगीर बड़े इमाम बाड़े में मजलिस का आयोजन किया गया। जिसमें इन धार्मिक स्थलों की विशेषता के साथ साथ कर्बला की घटनाओं पर भरपूर रोषनी डाली। आखिरी कड़ी मे मौलाना जमाल हैदर करबलाई ने मजलिस को खिताब करते हुए कर्बला के शहीदों के मसायब बयान किए। जिसे सुनकर हर अकीदतमंदों की आंखों से आंसू बह निकलें।
मजलिस के बाद जायरीनों की विदाई के लिए बड़ी संख्या में उपनगरवासी उमड़ पड़े। जियारत पर जाने वाले लोगों को फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। सकुशल यात्रा के लिए सभी लोगों ने अल्लाह की बारगाह में दुआएं की। मालूम हो कि जायरीनों का यह काफिला ईरान के मशहद, कुम, निशापुर, इराक के कर्बला व इसके बाद नजफ सहित मुकामी मुकद्दस जगहों पर जियारत करने के लिए जाएगा। मजलिस पूर्व पेशख्वानी माजिज मोलाई, हानी, महमूद रजा, बेताब, मन्जर व मर्सियाख्वानी अम्बर मेहदी व उनके हमनवा ने किया। काफिले में मौलाना जमाल हैदर करबलाई, नायाब हैदर नेता, कामयाब मास्टर, सरवर मेंहदी, मोजिज अब्बास, खेसाल अहमद सहित कई महिलाएं शामिल है।
मालूम हो कि सभी जायरीन इराक स्थित कर्बला व नजफ के बाद ईरान में धार्मिक स्थलों की जियारत करते हुए 22 दिन के उपरान्त अपने वतन वापस आयेगा।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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