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चुनाव सुधार के जरिये भ्रष्टाचार उन्मूलन पर विचार हुआ

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 1 जून, चुनाव सुधारों के जरिये भ्रष्टाचार उन्मूलन को लेकर प्रेस क्लब सभागार में लम्बी बहंस चली। फाइट अगेन्स्ट करप्शन थ्रो इलेक्टोरल रिफाॅर्म (फैक्टर) की ओर से आयोजित बहंस में पूर्व विधायक समाजवादी विचारधारा के राजमणि पाण्डेय, कांग्रेस उपाध्यक्ष प्रेमशंकर द्विवेदी, माकपा के कामरेड केके त्रिपाठी, पूर्व सूचना निदेशक दशरथ प्रसाद यादव, हरि ओम श्रीवास्तव, दिनेश चंद्र पाण्डेय, बाबूराम सिंह, मानिकराम मिश्रा, श्रवण सिंह, ज्योति पांडे, डा. वाहिद सिद्धीकी सहित कई प्रबुद्ध जनों ने बंहस में हिस्सा लिया। फैक्टर के संयोजक अरूण कुमार श्रीवास्तव ने बड़ी बारीकी से उन सभी विन्दुओं को पटल पर रखा जो चुनाव सुधारों की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
वक्ताओं ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने, राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के चुनाव खर्च आयोग द्वारा खुद किये जाने, चुनावों में नेताओं के बैनर पोस्टर पर लगी रोक हटाने, नेताओं द्वारा घोषित सम्पत्ति में हुई बढ़ोत्तरी को सरकारी सम्पत्ति घोषित करने, तीन साल से कम अवधि के कार्यकर्ता को टिकट न दिये जाने सहित अनेक सुझाव दिये। अरूण श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव सुधारोें के बगैर भ्रष्टाचार उन्मूलन की बात करना बेमानी होगी इसलिये भ्रष्टाचार खत्म करने या इस पर नियंत्रण करने से पूर्व चुनाव सुधारों को लागू करना होगा। राजनीतिक दलों में धीरे धीरे खत्म हो रही लोकतंात्रिक परंपरा पर अफसोस जताते हुये उन्होने कहा चुनाव आयोग को इस पर कड़ी दृष्टि रखनी होगी।
अध्यक्षता कर रहे पूर्व विधायक राजमणि पाण्डेय ने चुनाव सुधारों को लेकर अनेक उपाय सुझाये, कहा नियम चाहे जितने बना लिये जायें जब तक नेता या व्यवस्था का चरित्र नही बदलेगा तब तक भ्रष्टाचार पर नियंत्रण प्रभावी नही हो पायेगा। कामरेड केके त्रिपाठी ने बहंस को आगे बढ़ाते हुये लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने असहमति जाहिर किया। उन्होने कहा दोनो चुनाव अलग होने पर जनता को सरकारों को परखने का अवसर मिल जाता है। उन्होने कहा साफ सुथरा चुनाव स्वस्थ लोकतंत्र की रीढ़ है। पार्टियों के भीतर लोकतंत्र खत्म होने की बात पर कामरेड ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुये कहा कि माकपा में आज भी स्वस्थ लोकतंत्र है। सभी सांगठनिक चुनाव आयोग की देखरेख में होते हैं और कार्यवाही की प्रतियां आयोग को नियमित भेजी जाती हैं। दूसरे दलों में क्या है इससे उनका कोई लेना-देना नही है। कामरेड ने कहा दलों में जो सबसे खतरनाक स्थिति है वह है कार्यकर्ताओं की उपेक्षा। इससे कार्यकर्ता खत्म होते जा रहे हैं। इनकी जगह पेड कार्यकर्ता ले रहे हैं जो कभी पार्टी का भविष्य नही तय करते। इसका खामियाजा लोकतंत्र को भोगना होगा। कामरेड ने कारपोट फंडिग पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराया। कहा कारपोरेट जगत यदि चंदा देना चाहता है तो वह चुनाव आयोग या फिर भारत सरकार को करे। कारपोरेट फंडिंग पर तुरन्त रोक लगनी चाहिये, यह भ्रष्टाचार की एक बड़ी वजह है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष प्रेमशंकर द्विवेदी ने सांसद व विधायक निधि खत्म करने का सुझाव पटल पर रखते हुये स्टेट फंडिंग की वकालत की। कहा स्थानीय चुनावों में खर्च की सीमा कम करते हुये पूरी पारदर्शिता लागू करनी चाहिये। बहंस को आगे बढ़ाते हुये वक्ताओं ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने, आचार संहिता के दौरान प्रत्याशियों द्वारा मतदाताओं को मुफ्त चीजें बांटकर प्रलोभन देते पकड़े जाने वालों के खिलाफ समय भीतर कड़ी कार्यवाही किये जाने सहित अनेक सुझाव रखे। कार्यक्रम में हरीश पाल, एसके सिंह, हरि प्रकाश चैरसिया, स्कन्द शुक्ला,सामइन फारूकी, विरेन्द्र पाण्डेय, अनिल कुमार श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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