आज की ताजा खबर

चन्द्रमणि पाण्डेय ने समस्या निदान न होने पर आत्मदाह करने की घोषणा किया

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 26 मार्च, 29 मार्च तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इंतजार करने के बाद यदि समस्याओं का निवारण न हुआ तो 30 मार्च को आत्मदाह कर लूंगा आज कलेक्ट्रेट के प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से ’महामहिम राज्यपाल व मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में धरने के 19वें दिन चन्द्रमणि पाण्डेय ने सुप्रिमकोर्ट के इच्छा मृत्यु के आदेश के अनुपालन में आत्मदाह की अनुमति’ मांगते हुए पूंछा कि 1-दो-दो टोल भरने के बाद जनपद के प्रमुख चैराहे अंडरपास विहीन क्यों मेरे पत्राचार के क्रम में भूतल परिवहन मंत्रालय के आश्वासन के बाद लम्बित अण्डरपास के अभाव में आए दिन जाने जा रही हैं यहां तक 26/2/15 को मेरा भी मुरादीपुर चैराहा हर्रैया में एक्सीडेंट हो चुका है इस पर संवेदन शून्यता क्यो,ं 2-जून माह में सदर तहसीलदार अगस्त माह में उप जिलाधिकारी अक्टूबर माह में हिंदू युवा वाहिनी के अज्जू हिन्दुस्तानी जी के आश्वासन 28 दिसम्बर को उप मुख्यमंत्री की घोषणा 10 मार्च को सदर विधायक के आश्वासन के बाद आज तक अमहट पुल निर्माण की शासन की स्वीकृति क्यों नहीं 3-किसानों की खुशहाली के नाम पर केंद्र और प्रदेश में सत्तासीन होने के बाद भी किसान दुखी क्यों आपदा राहत का वितरण क्यों नहीं किसानों का बकाया विद्युत बिल माफ क्यों नहीं छुट्टा जानवरों से हो रही फसल नुकसान की पूर्तिपूर्ति या फसल सुरक्षा की ठोस नीति क्यों नहीं, 4-वन रैंक वन पेंसन का वादा कर सत्ता प्राप्ति के बाद द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिकों को उपेक्षित क्यों किया जा रहा है उनके पेंशन में वृद्धि क्यों नहीं, 5-शिक्षा चिकित्सा का 70 प्रतिशत भार ढोने वाले निजी विद्यालयों व चिकित्सालयों के शिक्षकों चिकित्सकों को मानदेय देकर आम आवाम को कहीं भी निःशुल्क शिक्षा चिकित्सा क्यों नहीं जबकि समान कार्य समान वेतन की नीति है, 6-सीसी फुटेज में कापी पेपर वितरण में अनियमितता पाए जाने के बाद भी गजाधर स्कूल के 10वीं के छात्रों की गणित की परीक्षा क्यों नहीं यदि जनहित में मेरी मांगों पर कोई लिखित आश्वासन नहीं मिलता है तो हम सूबे के मुखिया के नाते 29 मार्च तक योगी आदित्यनाथ के आने तक कार्यवाही का इंतजार करेंगें 30 मार्च को जनहित के लिए जीवन त्याग दूंगा से क्योंकि प्रण से पीछे हटना भी मौत ही है घाघरा की टकराती धारा में कल्यानपुर में धरना भारी बारिष में शवासन में 18 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक कुवानों नदी में जल सत्याग्रहल अब तक बस्ती के इतिहास में सबसे अधिक अवधि तक अनशन से समझ लेना चाहिए कि मैं जनहित में प्रण के आगे प्राण की चिंता नहीं करता।

About The Author

अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enter the text from the image below