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गौ सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है-आलोकानन्द

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर ) 16 नवम्बर, तहसील क्षेत्र के ग्राम कठौतिया किशुन गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में देर रात तक श्रोताओ की भीड जुटी रही। इस दिन वृन्दावन से आए कथा वाचक स्वामी आलोकानन्द ने गौ सेवा से मिलने वाले पुण्य की कथा के साथ ही श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग को विस्तार से सुनायां। कथा का शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण और राधा की झांकी की भव्य आरती के साथ हुआ। जिसके बाद स्वामी आलोकानन्द ने कहा कि संसार के लोगो को कई पुत्र प्राप्त होने से अच्छा है कि उन्हे एक ही पुत्र हो, जो संस्कारी हो। श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग प वर्णन करते हुए उन्होने कहा कि अगर श्रीकृष्ण के आचरण को व्यक्ति अपने जीवन में स्वीकार कर लें, तो उसके माता-पिता की आंखो से कभी दुःख का आंसू नही बहेगा। पूरे ब्रहाम्ण में श्रीकृष्ण और सुदामा जैसा कोई मित्र नही है। जो एक दुसरे की खुशी को लेकर संसार के सभी मोह, माया का त्याग करने को लेकर आतुर दिखे। लेकिन आज के परिवेश में श्रीकृष्ण जैसा मित्र नही मिलता है।
कथा को गति प्रदान करते हुए स्वामी आलोकानन्द ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का विस्तार से वर्णन किया। उन्होने कहा कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण मंे ही सारा ब्रहमाण्ड सामाहित है। श्रीकृष्ण जन्म होते ही पूरा पंडाल नन्द के आनन्द भयो जय कन्हैया लाल की आदि मंगलगीतो से गूंज उठा। इस दौरान कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की सुन्दर झांकी भी निकाली ।
कथा के पहले स्वामी आलोकानन्द ने कहा कि गौ-सेवा से बड़ा कोई पुण्य नही है। जिस घर में गौ माता की सेवा होती है, उस घर में 33 कोटि देवता निवास करते है। गौ, गुरू, और ग्रंथ का सभी को सम्मान करना चाहिए। इस दौरान कार्यक्रम आयोजक अष्अभुजा लाल श्रीवास्तव, संजय श्रीवास्तव, अशोक श्रीवास्तव, दीपक , राकेश, गायत्री तिवारी, भदई, फेरू, अलका श्रीवास्तव, जया श्रीवास्तव, सुनीता आदि भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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