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किसानो को नही मिल पा रहा है मुआवजा

(विचारपरक प्रतितिधि द्वारा)
डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर) 24 फरवरी, सिचांई विभाग के अधिकारियों द्वारा काश्तकारों की कीमती जमीनों का बिना मुआवजा दिये ही बांध निर्माण करा लिया गया है। वर्षो से मुआवजा की आस में काश्तकार विभागीय अधिकारियों की चैखट पर दस्तक दे रहे है। सिचांई निर्माण ख्ंाड सिद्धार्थनगर द्वारा लगभग 30 वर्ष पहले डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में बैदोला-भडरिया बाध का निर्माण बांढ की विनाश को रोकने के लिए शासन के निर्देश पर कराया गया था। परेशान किसानो का कहना है कि जब हम जवा थें तो हमारे बाप दादा ने खुशी-खुशी बांध के निर्माण के अपनी खेती की जमीन विभाग को दे दिया था। कुछ ऐसे भी है जो अब इस दुनिया में नही है। यही नही मुआवजा की आस में हम लेाग भी जवानी से बुढापें की दहलीज पर आ गये लेकिन मुआवजा नही मिला । परेशान किसान अब थक हारकर अपनी आप बीती समाचार पत्र कार्यालय पर सुना रहे है। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत माली मैनहा के दर्जनों किसान बांध के निर्माण में चली गयी जमीन के मुआवजों को लेकर 30 वर्षो से आस लगाये बैठे है। काश्तकारों को विभाग के अधिकारियों द्वारा मुआवजा देने के लिए बार-बार मौखिक आश्वासन दिया गया परन्तु अभी तक मुआवजे की एक भी किस्त आश्तकारों का नही मिल माई है।
मुआवजा पाने के लिउ काश्तकारों द्वारा अधीक्षण अभियन्ता सिचांई निर्माण खंड, सिचाई मंत्री उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ प्रमुख अभियंता सिचाई, जिला अधिकारी सिद्धार्थनगर, मंडलायुक्त बस्ती, मंडल बस्ती, राज्यपाल उत्तर प्रदेश, मानव जलसंसाधन मंत्री भारत सरकार, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सहित आलाधिकारियों को करीब एक साल पूर्व शिकायती पत्र भेजकर मुआवजा की मांग की गई थी।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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