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कर्मचारी जर्जर मकानों में रहने को मजबूर है

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 2 दिसम्बर, शहर के गांव गोडि़या मोहल्ले में स्थित रामनगर कालोनी जिसे सरयू नहर कालोनी के नाम से भी जाना जाता है। यह अपनी बदहाली की दांसता बयां कर रहा है। जर्जर आवासों में रह रहे कर्मचारियों को हमेशा अनहोनी की आशंका सताती रहती है। इतना ही नहीं अंधेरा और गन्दगी कालोनी की पहचान बन चुका है।
सरयू नगर खण्ड, बाढ़ खण्ड, नलकूप खण्ड आदि विभागों के कर्मचारी सरयू नहर कालोनी में रहते है। कालोनी में दो मंजिला सरकारी आवासों की हालत सबसे बदतर है। ऊपरी तल पर रहने लायक नहीं है। दीवारें और छत फट चुकी है। प्लास्टर उजड़ गया है। इसके बाद भी तमाम कर्मचारी मजबूरी में निवास कर रहे है। बरसात में छत टपकने लगती है तो खतरा और भी बढ़ जाता है। कर्मचारी ओम प्रकाश ने बताया कि आवास जर्जर है, मगर इनमें रहना भी उनकी मजबूरी है। जैसे तैसे खुद लोग मरम्मत कराकर इन आवासों में रहते है। वहीं ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले राम पारस चैधरी की पत्नी ने बताया कि छत टपकता था, इसकी खुद मरम्मत कराकर जैसे तैसे रहने लायक बनाया गया है। शौचालय के टैंक भठे पड़े है, इन्हें साफ न कराने से दिक्कत हो रही है। कालोनी में बने पार्क की चहारदीवारी वर्षों पूर्व टूट गई।
अब पार्क में गन्दगी की भरमार है। विद्युत पोलों पर पथ प्रकाश तक नहीं है जिससे शाम होते ही कालोनी में अंधेरा छा जाता है। कालोनी के लोगों का कहना है कि समस्याओं को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों से बात की गई, मगर अब तक हालात जस की तस बने है।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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