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(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 3 दिसम्बर, परिवहन विभाग की चूक का खामियाजा बस्ती के साढ़े चार लाख वाहन स्वामियों को झेलना पड़ा जिसके चलते उनके जेब से लगभग सवा दो करोड़ रुपये की चपत लग गई। जबकि विभाग के जिम्मेदार प्रारूप न उपलब्ध होने का बहाना बना कर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं। वाहनों के लिए हर छः माह बाद ‘नियंत्रित प्रदूषण’ का प्रमाण-पत्र बनवाना आवश्यक होता है।
इधर ‘भारत स्टेज फोर’ का मानक लागू होने के बाद केन्द्रीय मोटर यान नियमावली 1989 के नियम 115 के तहत वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण के सम्बन्ध में बदलाव कर दिया गया। इस नियम के उपनियम (7) में यह प्रावधान किया गया कि किसी भी मोटर यान के पंजीकृत होने की तिथि से एक साल खत्म होने के बाद ‘नियंत्रित प्रदूषण’ प्रमाण-पत्र राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी भी संस्था से प्राप्त कर वाहन के साथ अन्य प्रपत्रों के साथ-साथ रखना अनिवार्य है। बस्ती कार्यालय में छोटे-बड़े कुल 4 लाख 43 हजार वाहन पंजीकृत हैं।
परिवहन विभाग ने नियमों के बदलाव की भनक तक नहीं लगने दिया। इससे वाहन स्वामियों को कोई जानकारी नहीं मिल सकी। वाहन स्वामियों ने पहले की तरह छः माह खत्म होते ही ‘नियंत्रित प्रदूषण’ प्रमाण-पत्र बनवा लिया। जिसके चलते प्रति वाहन 50 रुपये शुल्क खर्च करने से लगभग साढ़े चार लाख वाहन स्वामियों का कुल लगभग सवा दो करोड़ रुपये का नुकसान हो गया।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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